जी हाँ, और उसकी हौसला-अफ़ज़ाई की गई है। अल्लाह निकाह को अपनी रहमत की एक निशानी बताता है, जिसमें उसने पति-पत्नी के बीच प्रेम और दया रखी है (30:21), और पैग़ंबर ﷺ ने सामर्थ्य रखने वालों को निकाह करने की ताकीद की।
और अगर तुमको अन्देशा हो कि (निकाह करके) तुम यतीम लड़कियों (की रखरखाव) में इन्साफ न कर सकोगे तो और औरतों में अपनी मर्ज़ी के मवाफ़िक दो दो और तीन तीन और चार चार निकाह करो (फिर अगर तुम्हें इसका) अन्देशा हो कि (मुततइद) बीवियों में (भी) इन्साफ न कर सकोगे तो एक ही पर इक्तेफ़ा करो या जो (लोंडी) तुम्हारी ज़र ख़रीद हो (उसी पर क़नाअत करो) ये तदबीर बेइन्साफ़ी न करने की बहुत क़रीने क़यास है
और अपनी (क़ौम की) बेशौहर औरतों और अपने नेक बख्त गुलामों और लौंडियों का निकाह कर दिया करो अगर ये लोग मोहताज होंगे तो खुदा अपने फज़ल व (करम) से उन्हें मालदार बना देगा और ख़ुदा तो बड़ी गुन्जाइश वाला वाक़िफ कार है
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
हदीस
1Sahih al-Bukhari 1905
Narrated 'Alqama:While I was walking with `Abdullah he said, "We were in the company of the Prophet (ﷺ) and he said, 'He who can afford to marry should marry, because it will help him refrain from looking at other women, and save his private parts from committing illegal sexual relation; and he who cannot afford to marry is advised to fast, as fasting will diminish his sexual power
अरबी पाठ (रावियों की कड़ी के साथ)
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، قَالَ بَيْنَا أَنَا أَمْشِي، مَعَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ فَقَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ " مَنِ اسْتَطَاعَ الْبَاءَةَ فَلْيَتَزَوَّجْ، فَإِنَّهُ أَغَضُّ لِلْبَصَرِ وَأَحْصَنُ لِلْفَرْجِ، وَمَنْ لَمْ يَسْتَطِعْ فَعَلَيْهِ بِالصَّوْمِ، فَإِنَّهُ لَهُ وِجَاءٌ ".