क्या मुसलमान ब्याज वाले बैंक में काम कर सकता है?

आलिमों में मतभेद है पैसा और व्यापार क़ुरआन · 1 हदीस · 1

संक्षिप्त जवाब

आलिम इस पर सहमत हैं कि ब्याज के अनुबंध लिखना, उनकी गवाही देना या उन्हें संभालना हराम है, क्योंकि पैग़ंबर ﷺ ने ब्याज लेने वाले, देने वाले, लिखने वाले और गवाही देने वाले पर लानत की। जिन कामों का ब्याज से सीधा संबंध नहीं, जैसे सफ़ाई या आईटी, उनके बारे में मतभेद है: कुछ वहाँ हर काम को हराम कहते हैं, जबकि दूसरे ज़रूरत में इसकी इजाज़त देते हैं। जब संभव हो, हलाल विकल्प खोजें।

दलील

क़ुरआन

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُحِلُّوا۟ شَعَٰٓئِرَ ٱللَّهِ وَلَا ٱلشَّهْرَ ٱلْحَرَامَ وَلَا ٱلْهَدْىَ وَلَا ٱلْقَلَٰٓئِدَ وَلَآ ءَآمِّينَ ٱلْبَيْتَ ٱلْحَرَامَ يَبْتَغُونَ فَضْلًۭا مِّن رَّبِّهِمْ وَرِضْوَٰنًۭا ۚ وَإِذَا حَلَلْتُمْ فَٱصْطَادُوا۟ ۚ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَـَٔانُ قَوْمٍ أَن صَدُّوكُمْ عَنِ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ أَن تَعْتَدُوا۟ ۘ وَتَعَاوَنُوا۟ عَلَى ٱلْبِرِّ وَٱلتَّقْوَىٰ ۖ وَلَا تَعَاوَنُوا۟ عَلَى ٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ ﴿٢﴾

ऐ ईमानदारों (देखो) न ख़ुदा की निशानियों की बेतौक़ीरी करो और न हुरमत वाले महिने की और न क़ुरबानी की और न पट्टे वाले जानवरों की (जो नज़रे ख़ुदा के लिए निशान देकर मिना में ले जाते हैं) और न ख़ानाए काबा की तवाफ़ (व ज़ियारत) का क़स्द करने वालों की जो अपने परवरदिगार की ख़ुशनूदी और फ़ज़ल (व करम) के जोयाँ हैं और जब तुम (एहराम) खोल दो तो शिकार कर सकते हो और किसी क़बीले की यह अदावत कि तुम्हें उन लोगों ने ख़ानाए काबा (में जाने) से रोका था इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम उनपर ज्यादती करने लगो और (तुम्हारा तो फ़र्ज यह है कि ) नेकी और परहेज़गारी में एक दूसरे की मदद किया करो और गुनाह और ज्यादती में बाहम किसी की मदद न करो और ख़ुदा से डरते रहो (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन बड़ा सख्त अज़ाब वाला है

हदीस

1 Sahih Muslim 1598

Jabir said that Allah's Messenger (ﷺ) cursed the accepter of interest and its payer, and one who records it, and the two witnesses, and he said:They are all equal

अरबी पाठ (रावियों की कड़ी के साथ)

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، قَالُوا حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، أَخْبَرَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ لَعَنَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم آكِلَ الرِّبَا وَمُوكِلَهُ وَكَاتِبَهُ وَشَاهِدَيْهِ وَقَالَ هُمْ سَوَاءٌ ‏.‏

इसे हदीस लाइब्रेरी में पढ़ें

यह आम जानकारी है, फ़तवा नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी योग्य आलिम से पूछें।

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