क़ुरआन की 112वीं सूरत

सूरह Al-Ikhlas

मक्की 4 आयतें पारा 30
Al-Ikhlas

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ﴿٢﴾

ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿٣﴾

न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना,

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ ﴿٤﴾

और उसका कोई हमसर नहीं

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

Al-Ikhlas 4 में से आयत 1

अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।

सूरह Al-Ikhlas के बारे में

सूरह Al-Ikhlas (الإخلاص) क़ुरआन की 112वीं सूरत है। इसमें 4 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।

इसका नाम, الإخلاص, अरबी में इस सूरत की पहचान है।

सूरह Al-Ikhlas के बारे में प्रश्न

सूरह Al-Ikhlas में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Ikhlas में 4 आयतें हैं।

सूरह Al-Ikhlas मक्की है या मदनी?

वर्गीकरण: मक्की।

सूरह Al-Ikhlas किस पारे में है?

सूरह Al-Ikhlas पारा 30 में है।

मैं सूरह Al-Ikhlas कहाँ सुन सकता हूँ?

इसे आयत-दर-आयत सुनने के लिए इस पन्ने पर प्ले दबाएँ, क़ारी: अब्दुर्रहमान अस-सुदैस, मिशारी अल-अफ़ासी, महमूद ख़लील अल-हुसरी, अब्दुल बासित अब्दुस-समद, माहिर अल-मुऐक़िली, साद अल-ग़ामिदी, अहमद अल-अजमी, अबू बक्र अश-शातरी, हानी अर-रिफ़ाई, मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिंशावी, अली अल-हुज़ैफ़ी, मुहम्मद अय्यूब, अब्दुल्लाह बसफ़र, यासिर अद-दौसरी, नासिर अल-क़तामी, सलाह अल-बुदैर, सऊद अश-शुरैम, अब्दुल्लाह अवाद अल-जुहनी, मुहम्मद जिब्रील।

This page is translated with machine assistance and may contain mistakes. The English and Arabic versions are our reference. About our sources