इस्लाम में समलैंगिक संबंधों का क्या हुक्म है?

हराम परिवार और रिश्ते क़ुरआन · 4

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम समलैंगिक कृत्यों को मना करता है, जैसा कि क़ुरआन ने लूत की क़ौम के क़िस्से में बयान किया है (7:80-81, 26:165-166)। हुक्म कृत्य के बारे में है। जो इंसान अपनी भावनाओं से जूझ रहा हो उसके साथ सम्मान और दया का व्यवहार होना चाहिए, तौबा हर किसी के लिए खुली है, और मुसलमानों को किसी को नुक़सान पहुँचाने या उसका अपमान करने की इजाज़त नहीं।

दलील

क़ुरआन

وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَتَأْتُونَ ٱلْفَٰحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنْ أَحَدٍۢ مِّنَ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿٨٠﴾

और (लूत को हमने रसूल बनाकर भेजा था) जब उन्होनें अपनी क़ौम से कहा कि (अफसोस) तुम ऐसी बदकारी (अग़लाम) करते हो कि तुमसे पहले सारी ख़ुदाई में किसी ने ऐसी बदकारी नहीं की थी

إِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهْوَةًۭ مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِ ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌۭ مُّسْرِفُونَ ﴿٨١﴾

हाँ तुम औरतों को छोड़कर शहवत परस्ती के वास्ते मर्दों की तरफ माएल होते हो (हालाकि उसकी ज़रूरत नहीं) मगर तुम लोग कुछ हो ही बेहूदा

أَتَأْتُونَ ٱلذُّكْرَانَ مِنَ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿١٦٥﴾

क्या तुम लोग (शहवत परस्ती के लिए) सारे जहाँ के लोगों में मर्दों ही के पास जाते हो

وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُم مِّنْ أَزْوَٰجِكُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ ﴿١٦٦﴾

और तुम्हारे वास्ते जो बीवियाँ तुम्हारे परवरदिगार ने पैदा की है उन्हें छोड़ देते हो (ये कुछ नहीं) बल्कि तुम लोग हद से गुज़र जाने वाले आदमी हो

यह आम जानकारी है, फ़तवा नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी योग्य आलिम से पूछें।

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