इसहाक़ वह बेटे हैं जो इब्राहीम को बुढ़ापे में दिए गए, और नेक लोगों में से एक नबी हैं।
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ख़ुशख़बरी
रसूल (फ़रिश्ते) इब्राहीम की पत्नी को इसहाक़ की और उनके बाद याक़ूब की ख़ुशख़बरी देते हैं। वे हैरान होती हैं, एक बूढ़ी औरत जिसका पति भी बूढ़ा है, और वे कहते हैं: “क्या तुम अल्लाह के हुक्म पर हैरान होती हो?” इसहाक़ को नेक लोगों में से एक नबी कहा गया है।
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
वह फरिश्ते बोले (हाए) तुम ख़ुदा की कुदरत से ताज्जुब करती हो ऐ अहले बैत (नबूवत) तुम पर ख़ुदा की रहमत और उसकी बरकते (नाज़िल हो) इसमें शक़ नहीं कि वह क़ाबिल हम्द (वासना) बुज़ुर्ग हैं
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला
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एक तोहफ़ा और एक रहनुमा
अल्लाह इब्राहीम को इसहाक़ और याक़ूब देता है, उनमें से हर एक को नबी और नेक बनाता है, और उन्हें ऐसे रहनुमा बनाता है जो उसके हुक्म से राह दिखाते हैं। वह उन्हें नेक काम करने, नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने की वह्य करता है।
ग़रज़ इबराहीम ने उन लोगों को और जिसे ये लोग खुदा को छोड़कर परसतिश किया करते थे छोड़ा तो हमने उन्हें इसहाक़ व याकूब (सी औलाद) अता फ़रमाई और हर एक को नुबूवत के दर्जे पर फ़ायज़ किया
और उन सबको (लोगों का) पेशवा बनाया कि हमारे हुक्म से (उनकी) हिदायत करते थे और हमने उनके पास नेक काम करने और नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ''वही'' भेजी थी और ये सब के सब हमारी ही इबादत करते थे
यह क़िस्सा केवल क़ुरआन से लिया गया है। दूसरी किताबों की तफ़सीलें नहीं जोड़ी गईं।
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi।