क्या मुसलमान मुहम्मद की इबादत करते हैं?

क़ुरआन और पैग़ंबर क़ुरआन · 2 Hadith · 1

संक्षिप्त जवाब

नहीं। मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करते हैं। मुहम्मद ﷺ का आख़िरी रसूल के रूप में आदर किया जाता है, लेकिन वे ईश्वरीय नहीं हैं, और उनकी इबादत करना इस्लाम में सबसे बड़ा गुनाह होगा।

विस्तृत जवाब

शहादा, वह घोषणा जो किसी इंसान को मुसलमान बनाती है, कहती है: 'अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं।' 'बंदा' शब्द जान-बूझकर 'रसूल' से पहले रखा गया है। क़ुरआन ख़ुद कहता है कि मुहम्मद ﷺ केवल एक रसूल हैं, और उनसे पहले भी रसूल गुज़र चुके हैं।

पैग़ंबर ﷺ ने फ़रमाया, 'मेरी तारीफ़ में उस तरह हद से न बढ़ो जैसे ईसाइयों ने मरयम के बेटे की तारीफ़ में बढ़ाई। मैं केवल एक बंदा हूँ, इसलिए कहो: अल्लाह का बंदा और उसका रसूल।' मुसलमान उनसे मोहब्बत करते हैं, उनका नाम आने पर 'उन पर सलामती और रहमत हो' कहते हैं और उनके तरीक़े पर चलते हैं, लेकिन दुआ केवल अल्लाह से करते हैं और माँगते केवल उसी से हैं।

क़ुरआन से

وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌۭ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ ۚ أَفَإِي۟ن مَّاتَ أَوْ قُتِلَ ٱنقَلَبْتُمْ عَلَىٰٓ أَعْقَٰبِكُمْ ۚ وَمَن يَنقَلِبْ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ فَلَن يَضُرَّ ٱللَّهَ شَيْـًۭٔا ۗ وَسَيَجْزِى ٱللَّهُ ٱلشَّٰكِرِينَ ﴿١٤٤﴾

(फिर लड़ाई से जी क्यों चुराते हो) और मोहम्मद तो सिर्फ रसूल हैं (ख़ुदा नहीं) इनसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर गुज़र चुके हैं फिर क्या अगर मोहम्मद अपनी मौत से मर जॉए या मार डाले जाएं तो तुम उलटे पॉव (अपने कुफ़्र की तरफ़) पलट जाओगे और जो उलटे पॉव फिरेगा (भी) तो (समझ लो) हरगिज़ ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा और अनक़रीब ख़ुदा का शुक्र करने वालों को अच्छा बदला देगा

قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ فَمَن كَانَ يَرْجُوا۟ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًۭا صَٰلِحًۭا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦٓ أَحَدًۢا ﴿١١٠﴾

(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी तुम्हारा ही ऐसा एक आदमी हूँ (फर्क़ इतना है) कि मेरे पास ये वही आई है कि तुम्हारे माबूद यकता माबूद हैं तो वो शख्स आरज़ूमन्द होकर अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होगा तो उसे अच्छे काम करने चाहिए और अपने परवरदिगार की इबादत में किसी को शरीक न करें

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 3445 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ سَمِعْتُ الزُّهْرِيَّ، يَقُولُ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، سَمِعَ عُمَرَ ـ رضى الله عنه ـ يَقُولُ عَلَى الْمِنْبَرِ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ تُطْرُونِي كَمَا أَطْرَتِ النَّصَارَى ابْنَ مَرْيَمَ، فَإِنَّمَا أَنَا عَبْدُهُ، فَقُولُوا عَبْدُ اللَّهِ وَرَسُولُهُ ‏"‏‏.‏

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