क़ुरआन लोगों को उस पर ग़ौर करने की दावत देता है और कहता है कि अगर यह अल्लाह के सिवा किसी और की ओर से होता तो वे इसमें बहुत से विरोधाभास पाते। वह उस जैसा एक अध्याय लाने की चुनौती देता है, और मुसलमान कहते हैं कि यह चुनौती 1,400 साल से खुली है। इसकी अरबी को ग़ैर-मुस्लिम अरबी विद्वान भी वाक्पटुता का चमत्कार मानते हैं।
मुसलमान का विश्वास केवल बौद्धिक नहीं होता। बहुत से लोग इसे पढ़ने का एक निजी अनुभव बताते हैं और कहते हैं कि उन्हें इसमें अपने सवालों के जवाब मिले। मुसलमान लोगों का स्वागत करते हैं कि वे इसे अनुवाद में, खुले मन से पढ़ें और इससे सवाल पूछें।