इस्लाम में जिन्न और शैतान कौन हैं?

जीवन, मृत्यु और आख़िरत क़ुरआन · 5 Hadith · 3

संक्षिप्त जवाब

जिन्न अल्लाह की एक और मख़लूक़ हैं, जो बिना धुएँ की आग से बने हैं, जिनके पास इंसानों की तरह इख़्तियार है, और कुछ उनमें ईमान वाले हैं और कुछ नहीं। शैतान (इबलीस) जिन्नों में से था जिसने घमंड में आदम को सजदा करने से इनकार किया और इंसानों का दुश्मन बन गया।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन में अल-जिन्न नाम का एक अध्याय है जो जिन्नों के उस समूह के बारे में है जिसने क़ुरआन सुना और ईमान लाया। मुसलमान मानते हैं कि जिन्न मौजूद हैं, आम तौर पर अनदेखे हैं और इंसानों की तरह अल्लाह के सामने जवाबदेह हैं। शैतान के पास किसी को मजबूर करने की ताक़त नहीं; वह केवल वसवसा डाल सकता है और बुला सकता है, और क़ुरआन कहता है कि उसकी चाल कमज़ोर है।

मुसलमान शैतान से पनाह माँगते हैं अल्लाह को याद करके, क़ुरआन पढ़कर और यह कहकर कि 'मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ शैतान मरदूद से'। इस्लाम भविष्यवक्ताओं और उन लोगों के दावों को ठुकराता है जो कहते हैं कि वे जिन्नों को क़ाबू करते हैं, और बराबरी के किसी बुरे ख़ुदा के विचार को ठुकराता है। शैतान अल्लाह का प्रतिद्वंद्वी नहीं है, और उसके पास उसके सिवा कोई ताक़त नहीं जो अल्लाह इजाज़त दे।

क़ुरआन से

قُلْ أُوحِىَ إِلَىَّ أَنَّهُ ٱسْتَمَعَ نَفَرٌۭ مِّنَ ٱلْجِنِّ فَقَالُوٓا۟ إِنَّا سَمِعْنَا قُرْءَانًا عَجَبًۭا ﴿١﴾

(ऐ रसूल लोगों से) कह दो कि मेरे पास 'वही' आयी है कि जिनों की एक जमाअत ने (क़ुरान को) जी लगाकर सुना तो कहने लगे कि हमने एक अजीब क़ुरान सुना है

وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ ﴿٥٦﴾

और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें

وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَٰٓئِكَةِ ٱسْجُدُوا۟ لِءَادَمَ فَسَجَدُوٓا۟ إِلَّآ إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ ٱلْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِۦٓ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُۥ وَذُرِّيَّتَهُۥٓ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِى وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّۢ ۚ بِئْسَ لِلظَّٰلِمِينَ بَدَلًۭا ﴿٥٠﴾

और (वह वक्त याद करो) जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया (ये इबलीस) जिन्नात से था तो अपने परवरदिगार के हुक्म से निकल भागा तो (लोगों) क्या मुझे छोड़कर उसको और उसकी औलाद को अपना दोस्त बनाते हो हालॉकि वह तुम्हारा (क़दीमी) दुश्मन हैं ज़ालिमों (ने ख़ुदा के बदले शैतान को अपना दोस्त बनाया ये उन) का क्या बुरा ऐवज़ है

وَلَقَدْ خَلَقْنَٰكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَٰكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلَٰٓئِكَةِ ٱسْجُدُوا۟ لِءَادَمَ فَسَجَدُوٓا۟ إِلَّآ إِبْلِيسَ لَمْ يَكُن مِّنَ ٱلسَّٰجِدِينَ ﴿١١﴾

हालाकि इसमें तो शक ही नहीं कि हमने तुम्हारे बाप आदम को पैदा किया फिर तुम्हारी सूरते बनायीं फिर हमनें फ़रिश्तों से कहा कि तुम सब के सब आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक पड़े मगर शैतान कि वह सजदा करने वालों में शामिल न हुआ।

ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يُقَٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُقَٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱلطَّٰغُوتِ فَقَٰتِلُوٓا۟ أَوْلِيَآءَ ٱلشَّيْطَٰنِ ۖ إِنَّ كَيْدَ ٱلشَّيْطَٰنِ كَانَ ضَعِيفًا ﴿٧٦﴾

(पस देखो) ईमानवाले तो ख़ुदा की राह में लड़ते हैं और कुफ्फ़ार शैतान की राह में लड़ते मरते हैं पस (मुसलमानों) तुम शैतान के हवा ख़ाहों से लड़ो और (कुछ परवाह न करो) क्योंकि शैतान का दाओ तो बहुत ही बोदा है

From the Sunnah

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1 Sahih Muslim 2996 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالَ عَبْدٌ أَخْبَرَنَا وَقَالَ ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ خُلِقَتِ الْمَلاَئِكَةُ مِنْ نُورٍ وَخُلِقَ الْجَانُّ مِنْ مَارِجٍ مِنْ نَارٍ وَخُلِقَ آدَمُ مِمَّا وُصِفَ لَكُمْ ‏"‏ ‏.‏

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2 Sahih Muslim 2814a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، عُثْمَانُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ إِلاَّ وَقَدْ وُكِّلَ بِهِ قَرِينُهُ مِنَ الْجِنِّ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَإِيَّاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ وَإِيَّاىَ إِلاَّ أَنَّ اللَّهَ أَعَانَنِي عَلَيْهِ فَأَسْلَمَ فَلاَ يَأْمُرُنِي إِلاَّ بِخَيْرٍ ‏"‏ ‏.‏

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3 Sahih al-Bukhari 3276 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ عُقَيْلٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ، قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَأْتِي الشَّيْطَانُ أَحَدَكُمْ فَيَقُولُ مَنْ خَلَقَ كَذَا مَنْ خَلَقَ كَذَا حَتَّى يَقُولَ مَنْ خَلَقَ رَبَّكَ فَإِذَا بَلَغَهُ فَلْيَسْتَعِذْ بِاللَّهِ، وَلْيَنْتَهِ ‏"‏‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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