وَءَاتُوا۟ ٱلنِّسَآءَ صَدُقَٰتِهِنَّ نِحْلَةًۭ ۚ فَإِن طِبْنَ لَكُمْ عَن شَىْءٍۢ مِّنْهُ نَفْسًۭا فَكُلُوهُ هَنِيٓـًۭٔا مَّرِيٓـًۭٔا ﴿٤﴾
और औरतों को उनके महर ख़ुशी ख़ुशी दे डालो फिर अगर वह ख़ुशी ख़ुशी तुम्हें कुछ छोड़ दे तो शौक़ से नौशे जान खाओ पियो
हलाल परिवार और रिश्ते क़ुरआन · 1
जी हाँ। क़ुरआन औरतों को उनके महर तोहफ़े के रूप में देने का हुक्म देता है (4:4)। यह पत्नी का हक़ है, और इसकी कोई तय रक़म नहीं है। यह आपसी रज़ामंदी से कम या ज़्यादा हो सकता है, और सबसे अच्छा वह है जो आसान और ख़ुलूस के साथ हो।
وَءَاتُوا۟ ٱلنِّسَآءَ صَدُقَٰتِهِنَّ نِحْلَةًۭ ۚ فَإِن طِبْنَ لَكُمْ عَن شَىْءٍۢ مِّنْهُ نَفْسًۭا فَكُلُوهُ هَنِيٓـًۭٔا مَّرِيٓـًۭٔا ﴿٤﴾
और औरतों को उनके महर ख़ुशी ख़ुशी दे डालो फिर अगर वह ख़ुशी ख़ुशी तुम्हें कुछ छोड़ दे तो शौक़ से नौशे जान खाओ पियो
यह आम जानकारी है, फ़तवा नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी योग्य आलिम से पूछें।
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