क्या सारे मुसलमान एक जैसा सोचते और करते हैं?

आम भ्रांतियाँ क़ुरआन · 2 Hadith · 3

संक्षिप्त जवाब

नहीं। मुसलमान लगभग दो अरब लोग हैं जिनकी संस्कृतियाँ, फ़िक़्ही मसलक, राजनीतिक विचार और अमल के स्तर अलग-अलग हैं। वे ईमान की बुनियादी बातों पर सहमत हैं, और बहुत से ब्योरों में अलग राय रखते हैं, जैसे किसी भी बड़े समुदाय के लोग।

विस्तृत जवाब

सुन्नी, शिया, इबादी, सूफ़ी और दूसरे हैं, और सुन्नी फ़िक़्ह के चार मुख्य मसलक हैं जो नमाज़, रोज़े और वित्त के कुछ बिंदुओं पर अलग राय रखते हैं। कुछ मुसलमान अमल में सख़्त होते हैं, दूसरे ढीले, और कुछ केवल नाम या संस्कृति से मुसलमान हैं। मलेशिया का मुसलमान रीति-रिवाज और पहनावे में मोरक्को या मिशिगन के मुसलमान से बहुत अलग हो सकता है।

इसीलिए समझदारी है कि किसी मुसलमान से उसका अपना नज़रिया पूछा जाए, और एक इंसान की कही बात को सबका प्रतिनिधित्व करने वाला न माना जाए। क़ुरआन ख़ुद कहता है कि लोगों को क़ौमों और क़बीलों में इसलिए बनाया गया कि वे एक-दूसरे को पहचानें।

क़ुरआन से

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَٰكُم مِّن ذَكَرٍۢ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَٰكُمْ شُعُوبًۭا وَقَبَآئِلَ لِتَعَارَفُوٓا۟ ۚ إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ ٱللَّهِ أَتْقَىٰكُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌۭ ﴿١٣﴾

लोगों हमने तो तुम सबको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया और हम ही ने तुम्हारे कबीले और बिरादरियाँ बनायीं ताकि एक दूसरे की शिनाख्त करे इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक तुम सबमें बड़ा इज्ज़तदार वही है जो बड़ा परहेज़गार हो बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफ़कार ख़बरदार है

وَأَنزَلْنَآ إِلَيْكَ ٱلْكِتَٰبَ بِٱلْحَقِّ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ ٱلْكِتَٰبِ وَمُهَيْمِنًا عَلَيْهِ ۖ فَٱحْكُم بَيْنَهُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ ۖ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَآءَهُمْ عَمَّا جَآءَكَ مِنَ ٱلْحَقِّ ۚ لِكُلٍّۢ جَعَلْنَا مِنكُمْ شِرْعَةًۭ وَمِنْهَاجًۭا ۚ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ وَلَٰكِن لِّيَبْلُوَكُمْ فِى مَآ ءَاتَىٰكُمْ ۖ فَٱسْتَبِقُوا۟ ٱلْخَيْرَٰتِ ۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًۭا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ ﴿٤٨﴾

और (ऐ रसूल) हमने तुम पर भी बरहक़ किताब नाज़िल की जो किताब (उसके पहले से) उसके वक्त में मौजूद है उसकी तसदीक़ करती है और उसकी निगेहबान (भी) है जो कुछ तुम पर ख़ुदा ने नाज़िल किया है उसी के मुताबिक़ तुम भी हुक्म दो और जो हक़ बात ख़ुदा की तरफ़ से आ चुकी है उससे कतरा के उन लोगों की ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और हमने तुम में हर एक के वास्ते (हस्बे मसलेहते वक्त) एक एक शरीयत और ख़ास तरीक़े पर मुक़र्रर कर दिया और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सब के सब को एक ही (शरीयत की) उम्मत बना देता मगर (मुख़तलिफ़ शरीयतों से) ख़ुदा का मतलब यह था कि जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें तुम्हारा इमतेहान करे बस तुम नेकी में लपक कर आगे बढ़ जाओ और (यक़ीन जानो कि) तुम सब को ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है

From the Sunnah

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1 Sahih Muslim 2586a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَثَلُ الْمُؤْمِنِينَ فِي تَوَادِّهِمْ وَتَرَاحُمِهِمْ وَتَعَاطُفِهِمْ مَثَلُ الْجَسَدِ إِذَا اشْتَكَى مِنْهُ عُضْوٌ تَدَاعَى لَهُ سَائِرُ الْجَسَدِ بِالسَّهَرِ وَالْحُمَّى ‏"‏ ‏.‏

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2 Sahih al-Bukhari 69 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو التَّيَّاحِ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَسِّرُوا وَلاَ تُعَسِّرُوا، وَبَشِّرُوا وَلاَ تُنَفِّرُوا ‏"‏‏.‏

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3 Sahih al-Bukhari 13 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏ وَعَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ، قَالَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ ‏"‏‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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