हलाल और हराम का क्या अर्थ है?

शरीअत, अधिकार और समाज क़ुरआन · 4 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

हलाल का अर्थ है जायज़ और हराम का अर्थ है मना। इस्लाम में हर चीज़ जायज़ है जब तक कोई पाठ उसे मना न करे। मना की गई चीज़ों में सूअर का मांस, ख़ून, शराब, ब्याज, चोरी, झूठ, व्यभिचार और हर नुक़सानदेह चीज़ शामिल हैं।

विस्तृत जवाब

हलाल खाना वह पाक खाना है जो मना की गई चीज़ों से मुक्त हो और, मांस के मामले में, ऐसे जानवर का जिसे अल्लाह के नाम से और रहम के साथ, एक तेज़ चीरे से ज़बह किया गया हो। हराम सिर्फ़ खाने से ज़्यादा को घेरता है: धोखे से या ब्याज से पैसा कमाना, जुआ और दूसरों को नुक़सान पहुँचाना हराम हैं। इनके बीच कुछ चीज़ें मकरूह या संदिग्ध हैं।

क़ुरआन कहता है कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए पाक चीज़ें जायज़ की हैं। सिद्धांत यह है कि मना की गई चीज़ें थोड़ी और साफ़ हैं, और वे इसलिए मना हैं कि वे शरीर, अक़्ल, माल या समाज को नुक़सान पहुँचाती हैं। दलीलों के साथ पूरी सूची इस वेबसाइट के हलाल और हराम भाग में है।

क़ुरआन से

حُرِّمَتْ عَلَيْكُمُ ٱلْمَيْتَةُ وَٱلدَّمُ وَلَحْمُ ٱلْخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيْرِ ٱللَّهِ بِهِۦ وَٱلْمُنْخَنِقَةُ وَٱلْمَوْقُوذَةُ وَٱلْمُتَرَدِّيَةُ وَٱلنَّطِيحَةُ وَمَآ أَكَلَ ٱلسَّبُعُ إِلَّا مَا ذَكَّيْتُمْ وَمَا ذُبِحَ عَلَى ٱلنُّصُبِ وَأَن تَسْتَقْسِمُوا۟ بِٱلْأَزْلَٰمِ ۚ ذَٰلِكُمْ فِسْقٌ ۗ ٱلْيَوْمَ يَئِسَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن دِينِكُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَٱخْشَوْنِ ۚ ٱلْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِى وَرَضِيتُ لَكُمُ ٱلْإِسْلَٰمَ دِينًۭا ۚ فَمَنِ ٱضْطُرَّ فِى مَخْمَصَةٍ غَيْرَ مُتَجَانِفٍۢ لِّإِثْمٍۢ ۙ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ ﴿٣﴾

(लोगों) मरा हुआ जानवर और ख़ून और सुअर का गोश्त और जिस (जानवर) पर (ज़िबाह) के वक्त ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे का नाम लिया जाए और गर्दन मरोड़ा हुआ और चोट खाकर मरा हुआ और जो कुएं (वगैरह) में गिरकर मर जाए और जो सींग से मार डाला गया हो और जिसको दरिन्दे ने फाड़ खाया हो मगर जिसे तुमने मरने के क़ब्ल ज़िबाह कर लो और (जो जानवर) बुतों (के थान) पर चढ़ा कर ज़िबाह किया जाए और जिसे तुम (पाँसे) के तीरों से बाहम हिस्सा बॉटो (ग़रज़ यह सब चीज़ें) तुम पर हराम की गयी हैं ये गुनाह की बात है (मुसलमानों) अब तो कुफ्फ़ार तुम्हारे दीन से (फिर जाने से) मायूस हो गए तो तुम उनसे तो डरो ही नहीं बल्कि सिर्फ मुझी से डरो आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया और तुमपर अपनी नेअमत पूरी कर दी और तुम्हारे (इस) दीने इस्लाम को पसन्द किया पस जो शख्स भूख़ में मजबूर हो जाए और गुनाह की तरफ़ माएल भी न हो (और कोई चीज़ खा ले) तो ख़ुदा बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ ٱلْمَيْتَةَ وَٱلدَّمَ وَلَحْمَ ٱلْخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ بِهِۦ لِغَيْرِ ٱللَّهِ ۖ فَمَنِ ٱضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍۢ وَلَا عَادٍۢ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌ ﴿١٧٣﴾

उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है पस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ كُلُوا۟ مِمَّا فِى ٱلْأَرْضِ حَلَٰلًۭا طَيِّبًۭا وَلَا تَتَّبِعُوا۟ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيْطَٰنِ ۚ إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوٌّۭ مُّبِينٌ ﴿١٦٨﴾

ऐ लोगों जो कुछ ज़मीन में हैं उस में से हलाल व पाकीज़ा चीज़ (शौक़ से) खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तो तुम्हारा ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّمَا ٱلْخَمْرُ وَٱلْمَيْسِرُ وَٱلْأَنصَابُ وَٱلْأَزْلَٰمُ رِجْسٌۭ مِّنْ عَمَلِ ٱلشَّيْطَٰنِ فَٱجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ﴿٩٠﴾

ऐ ईमानदारों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक (बुरे) शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 52 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، عَنْ عَامِرٍ، قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ بْنَ بَشِيرٍ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ الْحَلاَلُ بَيِّنٌ وَالْحَرَامُ بَيِّنٌ، وَبَيْنَهُمَا مُشَبَّهَاتٌ لاَ يَعْلَمُهَا كَثِيرٌ مِنَ النَّاسِ، فَمَنِ اتَّقَى الْمُشَبَّهَاتِ اسْتَبْرَأَ لِدِيِنِهِ وَعِرْضِهِ، وَمَنْ وَقَعَ فِي الشُّبُهَاتِ كَرَاعٍ يَرْعَى حَوْلَ الْحِمَى، يُوشِكُ أَنْ يُوَاقِعَهُ‏.‏ أَلاَ وَإِنَّ لِكُلِّ مَلِكٍ حِمًى، أَلاَ إِنَّ حِمَى اللَّهِ فِي أَرْضِهِ مَحَارِمُهُ، أَلاَ وَإِنَّ فِي الْجَسَدِ مُضْغَةً إِذَا صَلَحَتْ صَلَحَ الْجَسَدُ كُلُّهُ، وَإِذَا فَسَدَتْ فَسَدَ الْجَسَدُ كُلُّهُ‏.‏ أَلاَ وَهِيَ الْقَلْبُ ‏"‏‏.‏

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2 Sahih Muslim 1599a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ الْهَمْدَانِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، قَالَ سَمِعْتُهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ وَأَهْوَى النُّعْمَانُ بِإِصْبَعَيْهِ إِلَى أُذُنَيْهِ ‏ "‏ إِنَّ الْحَلاَلَ بَيِّنٌ وَإِنَّ الْحَرَامَ بَيِّنٌ وَبَيْنَهُمَا مُشْتَبِهَاتٌ لاَ يَعْلَمُهُنَّ كَثِيرٌ مِنَ النَّاسِ فَمَنِ اتَّقَى الشُّبُهَاتِ اسْتَبْرَأَ لِدِينِهِ وَعِرْضِهِ وَمَنْ وَقَعَ فِي الشُّبُهَاتِ وَقَعَ فِي الْحَرَامِ كَالرَّاعِي يَرْعَى حَوْلَ الْحِمَى يُوشِكُ أَنْ يَرْتَعَ فِيهِ أَلاَ وَإِنَّ لِكُلِّ مَلِكٍ حِمًى أَلاَ وَإِنَّ حِمَى اللَّهِ مَحَارِمُهُ أَلاَ وَإِنَّ فِي الْجَسَدِ مُضْغَةً إِذَا صَلَحَتْ صَلَحَ الْجَسَدُ كُلُّهُ وَإِذَا فَسَدَتْ فَسَدَ الْجَسَدُ كُلُّهُ أَلاَ وَهِيَ الْقَلْبُ ‏"‏ ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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