मुसलमान सूअर का मांस क्यों नहीं खा सकते?

शरीअत, अधिकार और समाज क़ुरआन · 3 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान सूअर का मांस इसलिए नहीं खाते कि अल्लाह ने क़ुरआन में इसे मना किया है। वे आज्ञाकारिता के रूप में बिना किसी कारण की ज़रूरत के हुक्म मानते हैं, हालाँकि बहुत से लोग इसमें सेहत और सफ़ाई के फ़ायदे भी देखते हैं।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन खाने के लिए चार चीज़ें हराम करता है: मुर्दार, ख़ून, सूअर का गोश्त और वह जो अल्लाह के सिवा किसी और के नाम पर ज़बह किया गया हो, और ज़रूरत की हालत में, जैसे जान बचाने के लिए, उनकी इजाज़त देता है। यहूदियत में भी सूअर का मांस मना है, और तौरात में यही नियम है।

मुसलमान यह दावा नहीं करते कि विज्ञान इस नियम को समझाता है। ईमान की कसौटी अल्लाह की हिकमत पर भरोसा करके उसका हुक्म मानना है। मुसलमान जिलेटिन, चर्बी और सूअर से बने दूसरे उत्पादों से भी बचता है जब वे पहचाने जा सकें।

क़ुरआन से

إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ ٱلْمَيْتَةَ وَٱلدَّمَ وَلَحْمَ ٱلْخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ بِهِۦ لِغَيْرِ ٱللَّهِ ۖ فَمَنِ ٱضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍۢ وَلَا عَادٍۢ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌ ﴿١٧٣﴾

उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है पस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

حُرِّمَتْ عَلَيْكُمُ ٱلْمَيْتَةُ وَٱلدَّمُ وَلَحْمُ ٱلْخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيْرِ ٱللَّهِ بِهِۦ وَٱلْمُنْخَنِقَةُ وَٱلْمَوْقُوذَةُ وَٱلْمُتَرَدِّيَةُ وَٱلنَّطِيحَةُ وَمَآ أَكَلَ ٱلسَّبُعُ إِلَّا مَا ذَكَّيْتُمْ وَمَا ذُبِحَ عَلَى ٱلنُّصُبِ وَأَن تَسْتَقْسِمُوا۟ بِٱلْأَزْلَٰمِ ۚ ذَٰلِكُمْ فِسْقٌ ۗ ٱلْيَوْمَ يَئِسَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن دِينِكُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَٱخْشَوْنِ ۚ ٱلْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِى وَرَضِيتُ لَكُمُ ٱلْإِسْلَٰمَ دِينًۭا ۚ فَمَنِ ٱضْطُرَّ فِى مَخْمَصَةٍ غَيْرَ مُتَجَانِفٍۢ لِّإِثْمٍۢ ۙ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ ﴿٣﴾

(लोगों) मरा हुआ जानवर और ख़ून और सुअर का गोश्त और जिस (जानवर) पर (ज़िबाह) के वक्त ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे का नाम लिया जाए और गर्दन मरोड़ा हुआ और चोट खाकर मरा हुआ और जो कुएं (वगैरह) में गिरकर मर जाए और जो सींग से मार डाला गया हो और जिसको दरिन्दे ने फाड़ खाया हो मगर जिसे तुमने मरने के क़ब्ल ज़िबाह कर लो और (जो जानवर) बुतों (के थान) पर चढ़ा कर ज़िबाह किया जाए और जिसे तुम (पाँसे) के तीरों से बाहम हिस्सा बॉटो (ग़रज़ यह सब चीज़ें) तुम पर हराम की गयी हैं ये गुनाह की बात है (मुसलमानों) अब तो कुफ्फ़ार तुम्हारे दीन से (फिर जाने से) मायूस हो गए तो तुम उनसे तो डरो ही नहीं बल्कि सिर्फ मुझी से डरो आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया और तुमपर अपनी नेअमत पूरी कर दी और तुम्हारे (इस) दीने इस्लाम को पसन्द किया पस जो शख्स भूख़ में मजबूर हो जाए और गुनाह की तरफ़ माएल भी न हो (और कोई चीज़ खा ले) तो ख़ुदा बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

قُل لَّآ أَجِدُ فِى مَآ أُوحِىَ إِلَىَّ مُحَرَّمًا عَلَىٰ طَاعِمٍۢ يَطْعَمُهُۥٓ إِلَّآ أَن يَكُونَ مَيْتَةً أَوْ دَمًۭا مَّسْفُوحًا أَوْ لَحْمَ خِنزِيرٍۢ فَإِنَّهُۥ رِجْسٌ أَوْ فِسْقًا أُهِلَّ لِغَيْرِ ٱللَّهِ بِهِۦ ۚ فَمَنِ ٱضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍۢ وَلَا عَادٍۢ فَإِنَّ رَبَّكَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ ﴿١٤٥﴾

(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक्ते ़ज़िबहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 2236 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ عَامَ الْفَتْحِ، وَهُوَ بِمَكَّةَ ‏"‏ إِنَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ حَرَّمَ بَيْعَ الْخَمْرِ وَالْمَيْتَةِ وَالْخِنْزِيرِ وَالأَصْنَامِ ‏"‏‏.‏ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ، أَرَأَيْتَ شُحُومَ الْمَيْتَةِ فَإِنَّهَا يُطْلَى بِهَا السُّفُنُ، وَيُدْهَنُ بِهَا الْجُلُودُ، وَيَسْتَصْبِحُ بِهَا النَّاسُ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ لاَ، هُوَ حَرَامٌ ‏"‏‏.‏ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عِنْدَ ذَلِكَ ‏"‏ قَاتَلَ اللَّهُ الْيَهُودَ، إِنَّ اللَّهَ لَمَّا حَرَّمَ شُحُومَهَا جَمَلُوهُ ثُمَّ بَاعُوهُ فَأَكَلُوا ثَمَنَهُ ‏"‏‏.‏ قَالَ أَبُو عَاصِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، كَتَبَ إِلَىَّ عَطَاءٌ سَمِعْتُ جَابِرًا ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏

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2 Sahih Muslim 1581a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي، رَبَاحٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ عَامَ الْفَتْحِ وَهُوَ بِمَكَّةَ ‏"‏ إِنَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ حَرَّمَ بَيْعَ الْخَمْرِ وَالْمَيْتَةِ وَالْخِنْزِيرِ وَالأَصْنَامِ ‏"‏ ‏.‏ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ شُحُومَ الْمَيْتَةِ فَإِنَّهُ يُطْلَى بِهَا السُّفُنُ وَيُدْهَنُ بِهَا الْجُلُودُ وَيَسْتَصْبِحُ بِهَا النَّاسُ فَقَالَ ‏"‏ لاَ هُوَ حَرَامٌ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عِنْدَ ذَلِكَ ‏"‏ قَاتَلَ اللَّهُ الْيَهُودَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَمَّا حَرَّمَ عَلَيْهِمْ شُحُومَهَا أَجْمَلُوهُ ثُمَّ بَاعُوهُ فَأَكَلُوا ثَمَنَهُ ‏"‏‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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