لِإِيلَٰفِ قُرَيْشٍ ﴿١﴾
चूँकि क़ुरैश को जाड़े और गर्मी के सफ़र से मानूस कर दिया है
क़ुरआन की 106वीं सूरत
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
لِإِيلَٰفِ قُرَيْشٍ ﴿١﴾
चूँकि क़ुरैश को जाड़े और गर्मी के सफ़र से मानूस कर दिया है
إِۦلَٰفِهِمْ رِحْلَةَ ٱلشِّتَآءِ وَٱلصَّيْفِ ﴿٢﴾
तो उनको मानूस कर देने की वजह से
فَلْيَعْبُدُوا۟ رَبَّ هَٰذَا ٱلْبَيْتِ ﴿٣﴾
इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करनी चाहिए
ٱلَّذِىٓ أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍۢ وَءَامَنَهُم مِّنْ خَوْفٍۭ ﴿٤﴾
जिसने उनको भूख में खाना दिया और उनको खौफ़ से अमन अता किया
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।
सूरह Quraysh (قريش) क़ुरआन की 106वीं सूरत है। इसमें 4 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।
इसका नाम, قريش, अरबी में इस सूरत की पहचान है।
सूरह Quraysh में 4 आयतें हैं।
वर्गीकरण: मक्की।
सूरह Quraysh पारा 30 में है।
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