क्या संगीत हराम है?

आलिमों में मतभेद है बोलचाल और अख़लाक़ क़ुरआन · 1

संक्षिप्त जवाब

आलिमों में मतभेद है। ज़्यादातर पुराने आलिमों का मत था कि वाद्य यंत्र हराम हैं; वे उस आयत पर भरोसा करते थे जो उस बेकार बात का ज़िक्र करती है जो अल्लाह की राह से भटकाती है (31:6), और उन हदीसों पर जिनसे उन्होंने उनकी मनाही समझी। दूसरों ने, जैसे इब्न हज़्म ने, ऐसे गाने और संगीत की इजाज़त दी जिनमें कुछ हराम न हो। सब इस पर सहमत हैं कि जिसमें अश्लील बोल हों या गुनाह की दावत हो वह हराम है, और यह कि शादी और ईद पर दफ़ बजाना जायज़ है। एहतियात के तौर पर संदिग्ध चीज़ छोड़ दें और किसी भरोसेमंद आलिम से पूछें।

दलील

क़ुरआन

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَشْتَرِى لَهْوَ ٱلْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍۢ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًا ۚ أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ ﴿٦﴾

और लोगों में बाज़ (नज़र बिन हारिस) ऐसा है जो बेहूदा क़िस्से (कहानियाँ) ख़रीदता है ताकि बग़ैर समझे बूझे (लोगों को) ख़ुदा की (सीधी) राह से भड़का दे और आयातें ख़ुदा से मसख़रापन करे ऐसे ही लोगों के लिए बड़ा रुसवा करने वाला अज़ाब है

यह आम जानकारी है, फ़तवा नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी योग्य आलिम से पूछें।

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