क्या मुसलमान क्रिसमस या दूसरे त्योहार मनाते हैं?

मुसलमानों के साथ रहना और काम करना क़ुरआन · 2 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

मुसलमानों के दो त्योहार हैं: ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा। ज़्यादातर आलिम कहते हैं कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की धार्मिक रस्मों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, और वे इस पर अलग राय रखते हैं कि पड़ोसियों को उनके त्योहार पर बधाई देना या मेहमान के रूप में किसी जश्न में जाना जायज़ है या नहीं।

विस्तृत जवाब

मुसलमान ईसा का आदर करते हैं और इसलिए उनमें से बहुत से क्रिसमस के मौसम का आदर करते हैं, लेकिन वे उन्हें अल्लाह का बेटा नहीं मानते, जो उस जश्न का आधार है। कुछ आलिम कहते हैं कि ईसाइयों को उनके त्योहार पर बधाई देना उस भलाई और इंसाफ़ का हिस्सा है जिसका क़ुरआन हुक्म देता है, और दूसरे इसके ख़िलाफ़ सलाह देते हैं। लगभग सब इस पर सहमत हैं कि भला होना, तोहफ़ा क़बूल करना और अच्छा पड़ोसी होना ठीक है।

अगर कोई मुसलमान दोस्त किसी जश्न में हिस्सा लेने से मना करे, तो यह धार्मिक यक़ीन की वजह से है, रूखेपन की वजह से नहीं। बहुत से मुसलमान दोस्ती की ख़ातिर कार्यस्थल के आयोजनों या मुलाक़ातों में शामिल होते हैं और धार्मिक हिस्से से बचते हैं।

क़ुरआन से

لَّا يَنْهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ لَمْ يُقَٰتِلُوكُمْ فِى ٱلدِّينِ وَلَمْ يُخْرِجُوكُم مِّن دِيَٰرِكُمْ أَن تَبَرُّوهُمْ وَتُقْسِطُوٓا۟ إِلَيْهِمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُقْسِطِينَ ﴿٨﴾

जो लोग तुमसे तुम्हारे दीन के बारे में नहीं लड़े भिड़े और न तुम्हें घरों से निकाले उन लोगों के साथ एहसान करने और उनके साथ इन्साफ़ से पेश आने से ख़ुदा तुम्हें मना नहीं करता बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है

لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ ﴿٦﴾

तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन

From the Sunnah

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1 Sunan Abi Dawud 1134 Sahih (Al-Albani)
Arabic text

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْمَدِينَةَ وَلَهُمْ يَوْمَانِ يَلْعَبُونَ فِيهِمَا فَقَالَ ‏"‏ مَا هَذَانِ الْيَوْمَانِ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا كُنَّا نَلْعَبُ فِيهِمَا فِي الْجَاهِلِيَّةِ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَبْدَلَكُمْ بِهِمَا خَيْرًا مِنْهُمَا يَوْمَ الأَضْحَى وَيَوْمَ الْفِطْرِ ‏"‏ ‏.‏

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2 Sunan Abi Dawud 4031 Hasan Sahih (Al-Albani)
Arabic text

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ ثَابِتٍ، حَدَّثَنَا حَسَّانُ بْنُ عَطِيَّةَ، عَنْ أَبِي مُنِيبٍ الْجُرَشِيِّ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ تَشَبَّهَ بِقَوْمٍ فَهُوَ مِنْهُمْ ‏"‏ ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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