इस्लाम किन नबियों में विश्वास करता है?

अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म क़ुरआन · 4 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान अल्लाह के सभी नबियों पर ईमान रखते हैं, आदम से लेकर मुहम्मद ﷺ तक। क़ुरआन उनमें से 25 के नाम बताता है, जिनमें नूह, इब्राहीम, मूसा, दाऊद, सुलैमान, यूसुफ़, यूनुस और ईसा शामिल हैं, और कहता है कि अल्लाह ने हर क़ौम में एक रसूल भेजा।

विस्तृत जवाब

मुसलमान सबका बराबर आदर करते हैं और उनके बीच फ़र्क़ नहीं करते। जो मुसलमान उनमें से किसी एक का इनकार करे वह मुसलमान नहीं रहता। हर नबी के नाम के बाद मुसलमान 'उन पर सलामती हो' कहते हैं। क़ुरआन उनके कई क़िस्से दोहराता है, जैसे यूसुफ़ का, मूसा का फ़िरऔन से संघर्ष और इब्राहीम का काबा बनाना।

क़ुरआन कहता है कि सबने एक ही बुनियादी संदेश दिया: केवल अल्लाह की इबादत करो। मुहम्मद ﷺ उनमें आख़िरी हैं, 'नबियों की मुहर', और उनके बाद कोई नबी नहीं आएगा। आप इसी वेबसाइट पर 25 नबियों के क़िस्से पढ़ सकते हैं, जो केवल क़ुरआन से लिए गए हैं।

क़ुरआन से

قُولُوٓا۟ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْنَا وَمَآ أُنزِلَ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِۦمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَ وَٱلْأَسْبَاطِ وَمَآ أُوتِىَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَمَآ أُوتِىَ ٱلنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍۢ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُۥ مُسْلِمُونَ ﴿١٣٦﴾

(और ऐ मुसलमानों तुम ये) कहो कि हम तो खुदा पर ईमान लाए हैं और उस पर जो हम पर नाज़िल किया गया (कुरान) और जो सहीफ़े इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुए थे (उन पर) और जो किताब मूसा व ईसा को दी गई (उस पर) और जो और पैग़म्बरों को उनके परवरदिगार की तरफ से उन्हें दिया गया (उस पर) हम तो उनमें से किसी (एक) में भी तफरीक़ नहीं करते और हम तो खुदा ही के फरमाबरदार हैं

ءَامَنَ ٱلرَّسُولُ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِ مِن رَّبِّهِۦ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۚ كُلٌّ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَكُتُبِهِۦ وَرُسُلِهِۦ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍۢ مِّن رُّسُلِهِۦ ۚ وَقَالُوا۟ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۖ غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ ٱلْمَصِيرُ ﴿٢٨٥﴾

हमारे पैग़म्बर (मोहम्मद) जो कुछ उनपर उनके परवरदिगार की तरफ से नाज़िल किया गया है उस पर ईमान लाए और उनके (साथ) मोमिनीन भी (सबके) सब ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए (और कहते हैं कि) हम ख़ुदा के पैग़म्बरों में से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते और कहने लगे ऐ हमारे परवरदिगार हमने (तेरा इरशाद) सुना

مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَآ أَحَدٍۢ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ ٱللَّهِ وَخَاتَمَ ٱلنَّبِيِّۦنَ ۗ وَكَانَ ٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًۭا ﴿٤٠﴾

(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है

۞ إِنَّآ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ كَمَآ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰ نُوحٍۢ وَٱلنَّبِيِّۦنَ مِنۢ بَعْدِهِۦ ۚ وَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَ وَٱلْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَٰرُونَ وَسُلَيْمَٰنَ ۚ وَءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ زَبُورًۭا ﴿١٦٣﴾

(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही' भेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास 'वही' भेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 3442 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عَنْهُ ـ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ أَنَا أَوْلَى النَّاسِ بِابْنِ مَرْيَمَ، وَالأَنْبِيَاءُ أَوْلاَدُ عَلاَّتٍ، لَيْسَ بَيْنِي وَبَيْنَهُ نَبِيٌّ ‏"‏‏.‏

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2 Sahih al-Bukhari 3443 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا فُلَيْحُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا هِلاَلُ بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي عَمْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَا أَوْلَى النَّاسِ بِعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ، وَالأَنْبِيَاءُ إِخْوَةٌ لِعَلاَّتٍ، أُمَّهَاتُهُمْ شَتَّى، وَدِينُهُمْ وَاحِدٌ ‏"‏‏.‏ وَقَالَ إِبْرَاهِيمُ بْنُ طَهْمَانَ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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