'अहले-किताब' कौन हैं और इस्लाम उन्हें कैसे देखता है?

अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म क़ुरआन · 4 Hadith · 1 स्रोत · 1

संक्षिप्त जवाब

अहले-किताब (किताब वाले) क़ुरआन में यहूदियों और ईसाइयों का नाम है, जिन्हें पहले की उतारी हुई किताबें मिली थीं। इस्लाम उन्हें विशेष आदर और दूसरे धर्मों के अनुयायियों के बीच एक विशेष स्थान देता है।

विस्तृत जवाब

मुसलमान अहले-किताब का खाना खा सकता है और उनकी पाकदामन औरतों से विवाह कर सकता है। क़ुरआन कहता है कि जो ईमान लाए, चाहे यहूदी हों, ईसाई हों या साबी, और नेक काम करें, उनका बदला उनके रब के पास है। वह कहता है कि मुसलमान उनसे केवल सबसे अच्छे तरीक़े से बहस करें, और जो मुसलमानों से नहीं लड़ते उनके साथ इंसाफ़ और भलाई का हुक्म देता है।

क़ुरआन कुछ अक़ीदों पर उनसे असहमत भी है, जैसे ईसा के ख़ुदा होने पर, और साफ़ बताता है कि वह कहाँ अलग है। मुसलमान मानते हैं कि ईमान वाला कड़ी असहमति रखकर भी भला रह सकता है। पैग़ंबर ﷺ मदीना में यहूदियों और ईसाइयों के साथ-साथ रहे और उनके साथ एक समझौता किया, और उन्होंने चेताया कि जो किसी ऐसे इंसान को क़त्ल करे जो सुरक्षा की संधि के अंतर्गत है, वह जन्नत की ख़ुशबू तक न सूँघेगा।

क़ुरआन से

ٱلْيَوْمَ أُحِلَّ لَكُمُ ٱلطَّيِّبَٰتُ ۖ وَطَعَامُ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ حِلٌّۭ لَّكُمْ وَطَعَامُكُمْ حِلٌّۭ لَّهُمْ ۖ وَٱلْمُحْصَنَٰتُ مِنَ ٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَٱلْمُحْصَنَٰتُ مِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ مِن قَبْلِكُمْ إِذَآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ مُحْصِنِينَ غَيْرَ مُسَٰفِحِينَ وَلَا مُتَّخِذِىٓ أَخْدَانٍۢ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِٱلْإِيمَٰنِ فَقَدْ حَبِطَ عَمَلُهُۥ وَهُوَ فِى ٱلْءَاخِرَةِ مِنَ ٱلْخَٰسِرِينَ ﴿٥﴾

आज तमाम पाकीज़ा चीजें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं और अहले किताब की ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) तुम्हारे लिए हलाल हैं और तुम्हारी ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) उनके लिए हलाल हैं और आज़ाद पाक दामन औरतें और उन लोगों में की आज़ाद पाक दामन औरतें जिनको तुमसे पहले किताब दी जा चुकी है जब तुम उनको उनके मेहर दे दो (और) पाक दामिनी का इरादा करो न तो खुल्लम खुल्ला ज़िनाकारी का और न चोरी छिपे से आशनाई का और जिस शख्स ने ईमान से इन्कार किया तो उसका सब किया (धरा) अकारत हो गया और (तुल्फ़ तो ये है कि) आख़ेरत में भी वही घाटे में रहेगा

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱلَّذِينَ هَادُوا۟ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلصَّٰبِـِٔينَ مَنْ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحًۭا فَلَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ﴿٦٢﴾

बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और ला मज़हबों में से जो कोई खुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खुदा के पास है और न (क़यामत में) उन पर किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे

۞ وَلَا تُجَٰدِلُوٓا۟ أَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ إِلَّا بِٱلَّتِى هِىَ أَحْسَنُ إِلَّا ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مِنْهُمْ ۖ وَقُولُوٓا۟ ءَامَنَّا بِٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيْنَا وَأُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَٰحِدٌۭ وَنَحْنُ لَهُۥ مُسْلِمُونَ ﴿٤٦﴾

और (ऐ ईमानदारों) अहले किताब से मनाज़िरा न किया करो मगर उमदा और शाएस्ता अलफाज़ व उनवान से लेकिन उनमें से जिन लोगों ने तुम पर ज़ुल्म किया (उनके साथ रिआयत न करो) और साफ साफ कह दो कि जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो किताब तुम पर नाज़िल हुई है हम तो सब पर ईमान ला चुके और हमारा माबूद और तुम्हारा माबूद एक ही है और हम उसी के फरमाबरदार है

لَّا يَنْهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ لَمْ يُقَٰتِلُوكُمْ فِى ٱلدِّينِ وَلَمْ يُخْرِجُوكُم مِّن دِيَٰرِكُمْ أَن تَبَرُّوهُمْ وَتُقْسِطُوٓا۟ إِلَيْهِمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُقْسِطِينَ ﴿٨﴾

जो लोग तुमसे तुम्हारे दीन के बारे में नहीं लड़े भिड़े और न तुम्हें घरों से निकाले उन लोगों के साथ एहसान करने और उनके साथ इन्साफ़ से पेश आने से ख़ुदा तुम्हें मना नहीं करता बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 3166 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا قَيْسُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا مُجَاهِدٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ قَتَلَ مُعَاهَدًا لَمْ يَرَحْ رَائِحَةَ الْجَنَّةِ، وَإِنَّ رِيحَهَا تُوجَدُ مِنْ مَسِيرَةِ أَرْبَعِينَ عَامًا ‏"‏‏.‏

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स्रोत

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  • Treaty with the Christians of Najran: Ibn Hisham, as-Sirah an-Nabawiyyah (an early biography).

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