इस्लाम ईसा के बारे में क्या कहता है?

अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म क़ुरआन · 4 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान ईसा (अलैहिस्सलाम) से मोहब्बत करते हैं और उन्हें अल्लाह के सबसे महान रसूलों में से एक मानकर उनका आदर करते हैं: वे कुँवारी मरयम से चमत्कारिक रूप से पैदा हुए, अल्लाह की इजाज़त से उन्होंने मोजिज़े दिखाए, और वे दुनिया के अंत से पहले लौटेंगे। मुसलमान उन्हें ईश्वर या ईश्वर का बेटा नहीं मानते।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन में ईसा का नाम लेकर 25 बार ज़िक्र है, और उनकी माँ मरयम के नाम पर क़ुरआन में एक पूरा अध्याय है। क़ुरआन कहता है कि वे मसीह थे, अल्लाह का एक कलिमा थे, उन्होंने गोद में बात की, अंधे और कोढ़ी को ठीक किया, और अल्लाह की इजाज़त से मुर्दों को ज़िंदगी दी। कोई मुसलमान ईसा को नबी माने बिना अपना ईमान पूरा नहीं करता।

क़ुरआन सिखाता है कि ईसा ने कभी नहीं कहा कि 'मेरी इबादत करो'। उन्होंने लोगों को केवल अल्लाह की इबादत की ओर बुलाया, जैसा सब नबियों ने किया। मुसलमान मानते हैं कि वे न क़त्ल हुए और न सूली पर चढ़ाए गए, बल्कि अल्लाह ने उन्हें ऊपर उठा लिया, और वे लौटेंगे और अपनी मृत्यु तक इस्लाम के संदेश पर चलने वाले एक न्यायप्रिय शासक के रूप में जिएँगे।

क़ुरआन से

إِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍۢ مِّنْهُ ٱسْمُهُ ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ وَجِيهًۭا فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَمِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ ﴿٤٥﴾

(वह वाक़िया भी याद करो) जब फ़रिश्तों ने (मरियम) से कहा ऐ मरियम ख़ुदा तुमको सिर्फ़ अपने हुक्म से एक लड़के के पैदा होने की खुशख़बरी देता है जिसका नाम ईसा मसीह इब्ने मरियम होगा (और) दुनिया और आखेरत (दोनों) में बाइज्ज़त (आबरू) और ख़ुदा के मुक़र्रब बन्दों में होगा

وَإِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ءَأَنتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِى وَأُمِّىَ إِلَٰهَيْنِ مِن دُونِ ٱللَّهِ ۖ قَالَ سُبْحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِىٓ أَنْ أَقُولَ مَا لَيْسَ لِى بِحَقٍّ ۚ إِن كُنتُ قُلْتُهُۥ فَقَدْ عَلِمْتَهُۥ ۚ تَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِى وَلَآ أَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِكَ ۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ ﴿١١٦﴾

और (वह वक्त भी याद करो) जब क़यामत में ईसा से ख़ुदा फरमाएग कि (क्यों) ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या तुमने लोगों से ये कह दिया था कि ख़ुदा को छोड़कर मुझ को और मेरी माँ को ख़ुदा बना लो ईसा अर्ज़ करेगें सुबहान अल्लाह मेरी तो ये मजाल न थी कि मै ऐसी बात मुँह से निकालूं जिसका मुझे कोई हक़ न हो (अच्छा) अगर मैने कहा होगा तो तुझको ज़रुर मालूम ही होगा क्योंकि तू मेरे दिल की (सब बात) जानता है हाँ अलबत्ता मै तेरे जी की बात नहीं जानता (क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तू ही ग़ैब की बातें ख़ूब जानता है

يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ لَا تَغْلُوا۟ فِى دِينِكُمْ وَلَا تَقُولُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلْحَقَّ ۚ إِنَّمَا ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ رَسُولُ ٱللَّهِ وَكَلِمَتُهُۥٓ أَلْقَىٰهَآ إِلَىٰ مَرْيَمَ وَرُوحٌۭ مِّنْهُ ۖ فَـَٔامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ ۖ وَلَا تَقُولُوا۟ ثَلَٰثَةٌ ۚ ٱنتَهُوا۟ خَيْرًۭا لَّكُمْ ۚ إِنَّمَا ٱللَّهُ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ سُبْحَٰنَهُۥٓ أَن يَكُونَ لَهُۥ وَلَدٌۭ ۘ لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًۭا ﴿١٧١﴾

ऐ अहले किताब अपने दीन में हद (एतदाल) से तजावुज़ न करो और ख़ुदा की शान में सच के सिवा (कोई दूसरी बात) न कहो मरियम के बेटे ईसा मसीह (न ख़ुदा थे न ख़ुदा के बेटे) पस ख़ुदा के एक रसूल और उसके कलमे (हुक्म) थे जिसे ख़ुदा ने मरियम के पास भेज दिया था (कि हामला हो जा) और ख़ुदा की तरफ़ से एक जान थे पस ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और तीन (ख़ुदा) के क़ायल न बनो (तसलीस से) बाज़ रहो (और) अपनी भलाई (तौहीद) का क़सद करो अल्लाह तो बस यकता माबूद है वह उस (नुक्स) से पाक व पाकीज़ा है उसका कोई लड़का हो (उसे लड़के की हाजत ही क्या है) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब तो उसी का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी में काफ़ी है

إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ ٱللَّهِ كَمَثَلِ ءَادَمَ ۖ خَلَقَهُۥ مِن تُرَابٍۢ ثُمَّ قَالَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ ﴿٥٩﴾

ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 3448 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ، لَيُوشِكَنَّ أَنْ يَنْزِلَ فِيكُمُ ابْنُ مَرْيَمَ حَكَمًا عَدْلاً، فَيَكْسِرَ الصَّلِيبَ، وَيَقْتُلَ الْخِنْزِيرَ، وَيَضَعَ الْجِزْيَةَ، وَيَفِيضَ الْمَالُ حَتَّى لاَ يَقْبَلَهُ أَحَدٌ، حَتَّى تَكُونَ السَّجْدَةُ الْوَاحِدَةُ خَيْرًا مِنَ الدُّنْيَا وَمَا فِيهَا ‏"‏‏.‏ ثُمَّ يَقُولُ أَبُو هُرَيْرَةَ وَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ ‏{‏وَإِنْ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلاَّ لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا‏}‏‏.‏

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2 Sahih Muslim 155a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَيُوشِكَنَّ أَنْ يَنْزِلَ فِيكُمُ ابْنُ مَرْيَمَ صلى الله عليه وسلم حَكَمًا مُقْسِطًا فَيَكْسِرَ الصَّلِيبَ وَيَقْتُلَ الْخِنْزِيرَ وَيَضَعَ الْجِزْيَةَ وَيَفِيضَ الْمَالُ حَتَّى لاَ يَقْبَلَهُ أَحَدٌ ‏"‏ ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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