इस्लाम के अनुसार क्या ईसा सूली पर मरे?

अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म क़ुरआन · 2 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

नहीं। क़ुरआन कहता है कि ईसा न क़त्ल किए गए और न सूली पर चढ़ाए गए, बल्कि लोगों को ऐसा ही दिखाया गया, जबकि अल्लाह ने उन्हें अपनी ओर उठा लिया। मुसलमान मानते हैं कि वे क़यामत के दिन से पहले धरती पर लौटेंगे।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन यह नहीं बताता कि उनकी जगह किसे या क्या दिखाया गया, और मुसलमानों को यह जानने की ज़रूरत भी नहीं। उनका विश्वास आयत के अपने कथन पर टिका है: उन्होंने उसे न क़त्ल किया और न सूली पर चढ़ाया, बल्कि उन्हें ऐसा ही भ्रम हुआ।

इस्लाम यह भी सिखाता है कि कोई जान किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाती, इसलिए माफ़ी पाने के लिए इंसान को किसी क़ुर्बानी की ज़रूरत नहीं। जो सच्चे दिल से तौबा करे उसे अल्लाह, जो सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है, सीधे माफ़ कर देता है। यह उस ईसाई विश्वास से एक अंतर है कि सूली ही मुक्ति का साधन है, और मुसलमान इसके बारे में आदर के साथ बात करते हैं।

क़ुरआन से

وَقَوْلِهِمْ إِنَّا قَتَلْنَا ٱلْمَسِيحَ عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ ٱللَّهِ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَٰكِن شُبِّهَ لَهُمْ ۚ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ لَفِى شَكٍّۢ مِّنْهُ ۚ مَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍ إِلَّا ٱتِّبَاعَ ٱلظَّنِّ ۚ وَمَا قَتَلُوهُ يَقِينًۢا ﴿١٥٧﴾ بَل رَّفَعَهُ ٱللَّهُ إِلَيْهِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًۭا ﴿١٥٨﴾

और उनके यह कहने की वजह से कि हमने मरियम के बेटे ईसा (स.) ख़ुदा के रसूल को क़त्ल कर डाला हालॉकि न तो उन लोगों ने उसे क़त्ल ही किया न सूली ही दी उनके लिए (एक दूसरा शख्स ईसा) से मुशाबेह कर दिया गया और जो लोग इस बारे में इख्तेलाफ़ करते हैं यक़ीनन वह लोग (उसके हालत) की तरफ़ से धोखे में (आ पड़े) हैं उनको उस (वाक़िये) की ख़बर ही नहीं मगर फ़क्त अटकल के पीछे (पड़े) हैं और ईसा को उन लोगों ने यक़ीनन क़त्ल नहीं किया बल्कि ख़ुदा ने उन्हें अपनी तरफ़ उठा लिया और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त तदबीर वाला है

إِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَىٰٓ إِنِّى مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَىَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَجَاعِلُ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوكَ فَوْقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ ۖ ثُمَّ إِلَىَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ ﴿٥٥﴾

और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 3448 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ، لَيُوشِكَنَّ أَنْ يَنْزِلَ فِيكُمُ ابْنُ مَرْيَمَ حَكَمًا عَدْلاً، فَيَكْسِرَ الصَّلِيبَ، وَيَقْتُلَ الْخِنْزِيرَ، وَيَضَعَ الْجِزْيَةَ، وَيَفِيضَ الْمَالُ حَتَّى لاَ يَقْبَلَهُ أَحَدٌ، حَتَّى تَكُونَ السَّجْدَةُ الْوَاحِدَةُ خَيْرًا مِنَ الدُّنْيَا وَمَا فِيهَا ‏"‏‏.‏ ثُمَّ يَقُولُ أَبُو هُرَيْرَةَ وَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ ‏{‏وَإِنْ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلاَّ لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا‏}‏‏.‏

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2 Sahih Muslim 155a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَيُوشِكَنَّ أَنْ يَنْزِلَ فِيكُمُ ابْنُ مَرْيَمَ صلى الله عليه وسلم حَكَمًا مُقْسِطًا فَيَكْسِرَ الصَّلِيبَ وَيَقْتُلَ الْخِنْزِيرَ وَيَضَعَ الْجِزْيَةَ وَيَفِيضَ الْمَالُ حَتَّى لاَ يَقْبَلَهُ أَحَدٌ ‏"‏ ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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