क्या मुसलमान मानते हैं कि सारे ग़ैर-मुस्लिम जहन्नम में जाएँगे?

अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म क़ुरआन · 4 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान मानते हैं कि जन्नत या जहन्नम में कौन जाएगा यह केवल अल्लाह तय करता है, और वह पूरे इंसाफ़ और रहमत के साथ फ़ैसला करता है। किसी मुसलमान को यह कहने का हक़ नहीं कि कोई ख़ास इंसान जहन्नम में है।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन कहता है कि जो इस्लाम के सिवा कोई और दीन चाहे, वह उससे क़बूल नहीं किया जाएगा, और यह भी कहता है कि अल्लाह किसी क़ौम को तब तक सज़ा नहीं देता जब तक उनके पास कोई रसूल साफ़ संदेश के साथ न आ जाए। आलिम समझाते हैं कि जिन तक इस्लाम का संदेश कभी साफ़ तौर पर नहीं पहुँचा, या बिगड़े रूप में पहुँचा, उनकी क़यामत के दिन परीक्षा होगी और उनका इंसाफ़ से फ़ैसला होगा। क़ुरआन यहूदियों, ईसाइयों और साबियों के उन समूहों का भी ज़िक्र करता है जो अल्लाह और आख़िरी दिन पर ईमान रखते और नेक काम करते हैं, और कहता है कि उनका बदला उनके लिए है।

पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ुस्से पर भारी है। इसलिए मुसलमान सबके लिए रहमत की उम्मीद रखते हैं, लोगों को नरमी के साथ इस्लाम की दावत देते हैं, और अंतिम फ़ैसला अल्लाह पर छोड़ते हैं। मुसलमान यह ज़रूर मानते हैं कि सच जान लेने के बाद उसे ठुकराना एक गंभीर बात है।

क़ुरआन से

وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ ٱلْإِسْلَٰمِ دِينًۭا فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِى ٱلْءَاخِرَةِ مِنَ ٱلْخَٰسِرِينَ ﴿٨٥﴾

और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आख़िरत में सख्त घाटे में रहेगा

مَّنِ ٱهْتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِى لِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَا ۚ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌۭ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۗ وَمَا كُنَّا مُعَذِّبِينَ حَتَّىٰ نَبْعَثَ رَسُولًۭا ﴿١٥﴾

जो शख़्श रुबरु होता है तो बस अपने फायदे के लिए यह पर आता है और जो शख़्श गुमराह होता है तो उसने भटक कर अपना आप बिगाड़ा और कोई शख़्श किसी दूसरे (के गुनाह) का बोझ अपने सर नहीं लेगा और हम तो जब तक रसूल को भेजकर तमाम हुज्जत न कर लें किसी पर अज़ाब नहीं किया करते

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱلَّذِينَ هَادُوا۟ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلصَّٰبِـِٔينَ مَنْ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحًۭا فَلَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ﴿٦٢﴾

बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और ला मज़हबों में से जो कोई खुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खुदा के पास है और न (क़यामत में) उन पर किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे

۞ وَٱكْتُبْ لَنَا فِى هَٰذِهِ ٱلدُّنْيَا حَسَنَةًۭ وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ إِنَّا هُدْنَآ إِلَيْكَ ۚ قَالَ عَذَابِىٓ أُصِيبُ بِهِۦ مَنْ أَشَآءُ ۖ وَرَحْمَتِى وَسِعَتْ كُلَّ شَىْءٍۢ ۚ فَسَأَكْتُبُهَا لِلَّذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلَّذِينَ هُم بِـَٔايَٰتِنَا يُؤْمِنُونَ ﴿١٥٦﴾

और तू ही इस दुनिया (फ़ानी) और आख़िरत में हमारे वास्ते भलाई के लिए लिख ले हम तेरी ही तरफ रूझू करते हैं ख़ुदा ने फरमाया जिसको मैं चाहता हूँ (मुस्तहक़ समझकर) अपना अज़ाब पहुँचा देता हूँ और मेरी रहमत हर चीज़ पर छाई हैं मै तो उसे बहुत जल्द ख़ास उन लोगों के लिए लिख दूँगा (जो बुरी बातों से) बचते रहेंगे और ज़कात दिया करेंगे और जो हमारी बातों पर ईमान रखा करेंगें

From the Sunnah

The authentic hadith behind this answer, from Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim and the Sunan with the grade of the scholars of hadith. Open a reference to read it in the hadith library of this site.

1 Sahih Muslim 153 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنِي يُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ وَأَخْبَرَنِي عَمْرٌو، أَنَّ أَبَا يُونُسَ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ لاَ يَسْمَعُ بِي أَحَدٌ مِنْ هَذِهِ الأُمَّةِ يَهُودِيٌّ وَلاَ نَصْرَانِيٌّ ثُمَّ يَمُوتُ وَلَمْ يُؤْمِنْ بِالَّذِي أُرْسِلْتُ بِهِ إِلاَّ كَانَ مِنْ أَصْحَابِ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏

Read it in the hadith library

2 Sahih Muslim 2658e प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُلِدَ عَلَى الْفِطْرَةِ فَأَبَوَاهُ يُهَوِّدَانِهِ وَيُنَصِّرَانِهِ وَيُشَرِّكَانِهِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ لَوْ مَاتَ قَبْلَ ذَلِكَ قَالَ ‏"‏ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا كَانُوا عَامِلِينَ ‏"‏ ‏.‏

Read it in the hadith library

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

This page is translated with machine assistance and may contain mistakes. The English and Arabic versions are our reference. About our sources