क्या इस्लाम का अल्लाह क्रोधी और बदला लेने वाला है, या रहम करने वाला?

अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म क़ुरआन · 3 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम में अल्लाह सबसे बड़ा रहम करने वाला है। क़ुरआन का एक को छोड़कर हर अध्याय उसकी रहमत से खुलता है, और पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि अल्लाह ने अपने ऊपर लिख लिया है: 'मेरी रहमत मेरे ग़ुस्से पर हावी है।'

विस्तृत जवाब

क़ुरआन उन लोगों से जिन्होंने गुनाह किए और अपने ऊपर ज़ुल्म किया कहता है कि अल्लाह की रहमत से निराश न हों, क्योंकि जो तौबा करे उसके सारे गुनाह वह माफ़ कर देता है। मुसलमान किसी पादरी के सामने इक़रार नहीं करता। वह किसी भी घड़ी सीधे अल्लाह की ओर लौटता है और उससे माफ़ी माँगता है।

अल्लाह इंसाफ़ करने वाला भी है, और इस्लाम ग़लत कामों की जवाबदेही सिखाता है, ख़ासकर दूसरों को नुक़सान पहुँचाने की। लेकिन पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि अल्लाह अपने बंदों पर माँ के अपने बच्चे पर रहम से भी ज़्यादा रहम करने वाला है। मुसलमान का अल्लाह से रिश्ता मोहब्बत, उम्मीद और अदब तीनों का रिश्ता है।

क़ुरआन से

۞ قُلْ يَٰعِبَادِىَ ٱلَّذِينَ أَسْرَفُوا۟ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا۟ مِن رَّحْمَةِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَغْفِرُ ٱلذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ﴿٥٣﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों जिन्होने (गुनाह करके) अपनी जानों पर ज्यादतियाँ की हैं तुम लोग ख़ुदा की रहमत से नाउम्मीद न होना बेशक ख़ुदा (तुम्हारे) कुल गुनाहों को बख्श देगा वह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

۞ وَٱكْتُبْ لَنَا فِى هَٰذِهِ ٱلدُّنْيَا حَسَنَةًۭ وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ إِنَّا هُدْنَآ إِلَيْكَ ۚ قَالَ عَذَابِىٓ أُصِيبُ بِهِۦ مَنْ أَشَآءُ ۖ وَرَحْمَتِى وَسِعَتْ كُلَّ شَىْءٍۢ ۚ فَسَأَكْتُبُهَا لِلَّذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلَّذِينَ هُم بِـَٔايَٰتِنَا يُؤْمِنُونَ ﴿١٥٦﴾

और तू ही इस दुनिया (फ़ानी) और आख़िरत में हमारे वास्ते भलाई के लिए लिख ले हम तेरी ही तरफ रूझू करते हैं ख़ुदा ने फरमाया जिसको मैं चाहता हूँ (मुस्तहक़ समझकर) अपना अज़ाब पहुँचा देता हूँ और मेरी रहमत हर चीज़ पर छाई हैं मै तो उसे बहुत जल्द ख़ास उन लोगों के लिए लिख दूँगा (जो बुरी बातों से) बचते रहेंगे और ज़कात दिया करेंगे और जो हमारी बातों पर ईमान रखा करेंगें

قُل لِّمَن مَّا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ قُل لِّلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلَىٰ نَفْسِهِ ٱلرَّحْمَةَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ﴿١٢﴾

(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि (भला) जो कुछ आसमान और ज़मीन में है किसका है (वह जवाब देगें) तुम ख़ुद कह दो कि ख़ास ख़ुदा का है उसने अपनी ज़ात पर मेहरबानी लाज़िम कर ली है वह तुम सब के सब को क़यामत के दिन जिसके आने मे कुछ शक़ नहीं ज़रुर जमा करेगा (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (क़यामत पर) ईमान न लाएंगें

From the Sunnah

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1 Sahih Muslim 2751a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ، - يَعْنِي الْحِزَامِيَّ - عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَمَّا خَلَقَ اللَّهُ الْخَلْقَ كَتَبَ فِي كِتَابِهِ فَهُوَ عِنْدَهُ فَوْقَ الْعَرْشِ إِنَّ رَحْمَتِي تَغْلِبُ غَضَبِي ‏"‏ ‏.‏

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2 Sahih al-Bukhari 5999 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ، حَدَّثَنَا أَبُو غَسَّانَ، قَالَ حَدَّثَنِي زَيْدُ بْنُ أَسْلَمَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ ـ رضى الله عنه ـ قَدِمَ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم سَبْىٌ، فَإِذَا امْرَأَةٌ مِنَ السَّبْىِ قَدْ تَحْلُبُ ثَدْيَهَا تَسْقِي، إِذَا وَجَدَتْ صَبِيًّا فِي السَّبْىِ أَخَذَتْهُ فَأَلْصَقَتْهُ بِبَطْنِهَا وَأَرْضَعَتْهُ، فَقَالَ لَنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَتَرَوْنَ هَذِهِ طَارِحَةً وَلَدَهَا فِي النَّارِ ‏"‏‏.‏ قُلْنَا لاَ وَهْىَ تَقْدِرُ عَلَى أَنْ لاَ تَطْرَحَهُ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ اللَّهُ أَرْحَمُ بِعِبَادِهِ مِنْ هَذِهِ بِوَلَدِهَا ‏"‏‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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