قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿١﴾ ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ﴿٢﴾ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿٣﴾ وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ ﴿٤﴾
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना, और उसका कोई हमसर नहीं
अल्लाह ईश्वर के लिए अरबी नाम है, हर चीज़ का एक ही पैदा करने वाला। वह इब्राहीम, मूसा और ईसा के ईश्वर से कोई अलग ईश्वर नहीं है। अरबी बोलने वाले ईसाई और यहूदी भी ईश्वर के लिए अल्लाह शब्द इस्तेमाल करते हैं।
इस्लाम में ईश्वर एक है, सदा से है, सब कुछ जानने वाला और हर चीज़ पर क़ादिर है। वह न पैदा हुआ और न उसने किसी को जन्म दिया, और कोई चीज़ उसके जैसी नहीं। वह सबसे बड़ा रहम करने वाला भी है: क़ुरआन के 114 अध्यायों में से एक को छोड़कर सब इन शब्दों से शुरू होते हैं: 'अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, बेहद रहम करने वाला है'।
मुसलमान अल्लाह को उसके सुंदर नामों से जानते हैं, जैसे सबसे बड़ा रहम करने वाला, माफ़ करने वाला, इंसाफ़ करने वाला, हिकमत वाला और मोहब्बत करने वाला। क़ुरआन कहता है कि वह इंसान की गर्दन की नस से भी ज़्यादा क़रीब है और पुकारने वाले की पुकार का जवाब देता है। मुसलमान सीधे उसी से दुआ करते हैं, इंसान और अल्लाह के बीच कोई पुजारी नहीं होता।
قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿١﴾ ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ﴿٢﴾ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿٣﴾ وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ ﴿٤﴾
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना, और उसका कोई हमसर नहीं
وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِۦ نَفْسُهُۥ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ ٱلْوَرِيدِ ﴿١٦﴾
और बेशक हम ही ने इन्सान को पैदा किया और जो ख्यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम तो उसकी शहरग से भी ज्यादा क़रीब हैं
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حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، سَمِعْتُ أَبَا صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى أَنَا عِنْدَ ظَنِّ عَبْدِي بِي، وَأَنَا مَعَهُ إِذَا ذَكَرَنِي، فَإِنْ ذَكَرَنِي فِي نَفْسِهِ ذَكَرْتُهُ فِي نَفْسِي، وَإِنْ ذَكَرَنِي فِي مَلأٍ ذَكَرْتُهُ فِي مَلأٍ خَيْرٍ مِنْهُمْ، وَإِنْ تَقَرَّبَ إِلَىَّ بِشِبْرٍ تَقَرَّبْتُ إِلَيْهِ ذِرَاعًا، وَإِنْ تَقَرَّبَ إِلَىَّ ذِرَاعًا تَقَرَّبْتُ إِلَيْهِ بَاعًا، وَإِنْ أَتَانِي يَمْشِي أَتَيْتُهُ هَرْوَلَةً ".
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، - وَاللَّفْظُ لِقُتَيْبَةَ - قَالاَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَنَا عِنْدَ ظَنِّ عَبْدِي بِي وَأَنَا مَعَهُ حِينَ يَذْكُرُنِي إِنْ ذَكَرَنِي فِي نَفْسِهِ ذَكَرْتُهُ فِي نَفْسِي وَإِنْ ذَكَرَنِي فِي مَلإٍ ذَكَرْتُهُ فِي مَلإٍ هُمْ خَيْرٌ مِنْهُمْ وَإِنْ تَقَرَّبَ مِنِّي شِبْرًا تَقَرَّبْتُ إِلَيْهِ ذِرَاعًا وَإِنْ تَقَرَّبَ إِلَىَّ ذِرَاعًا تَقَرَّبْتُ مِنْهُ بَاعًا وَإِنْ أَتَانِي يَمْشِي أَتَيْتُهُ هَرْوَلَةً " .
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.
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