क्या इस्लाम में औरतों पर हिजाब थोपा जाता है?

औरतें, परिवार और विवाह क़ुरआन · 2 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

ऐसा नहीं होना चाहिए। इस्लाम में कोई फ़र्ज़ अल्लाह के नज़दीक तब तक मूल्य नहीं रखता जब तक वह अपनी मर्ज़ी से न किया जाए, और क़ुरआन कहता है कि दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं। औरत पर हिजाब थोपना, जैसा कुछ परिवार या सरकारें करती हैं, एक सांस्कृतिक या राजनीतिक रिवाज है, इस्लामी आदर्श नहीं।

विस्तृत जवाब

दुनिया भर में लाखों औरतें इसे अपनी मर्ज़ी से पहनती हैं, और बहुत सी मुसलमान औरतें नहीं भी पहनतीं। कुछ देशों में यह क़ानून है और दूसरों में, जैसे यूरोप के कुछ हिस्सों में, कुछ जगहों पर इस पर पाबंदी है। अपने ईमान की क़द्र करने वाले मुसलमान दोनों की आलोचना करते हैं: औरत का यह चुनने का हक़ कि वह क्या पहने, एक उसूल है, दबाव चाहे जिस ओर से हो।

कुछ परिवारों और समाजों में दबाव और ज़्यादती सचमुच होती है, और मुसलमान औरतों के समूह उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हैं। पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि आमाल का दारोमदार नीयतों पर है, और जो फ़र्ज़ मोहब्बत से अदा करे उसे उससे ज़्यादा सवाब मिलता है जो मजबूरी से करे।

क़ुरआन से

لَآ إِكْرَاهَ فِى ٱلدِّينِ ۖ قَد تَّبَيَّنَ ٱلرُّشْدُ مِنَ ٱلْغَىِّ ۚ فَمَن يَكْفُرْ بِٱلطَّٰغُوتِ وَيُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ فَقَدِ ٱسْتَمْسَكَ بِٱلْعُرْوَةِ ٱلْوُثْقَىٰ لَا ٱنفِصَامَ لَهَا ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ﴿٢٥٦﴾

दीन में किसी तरह की जबरदस्ती नहीं क्योंकि हिदायत गुमराही से (अलग) ज़ाहिर हो चुकी तो जिस शख्स ने झूठे खुदाओं बुतों से इंकार किया और खुदा ही पर ईमान लाया तो उसने वो मज़बूत रस्सी पकड़ी है जो टूट ही नहीं सकती और ख़ुदा सब कुछ सुनता और जानता है

وَقُلِ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَن شَآءَ فَلْيُؤْمِن وَمَن شَآءَ فَلْيَكْفُرْ ۚ إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلظَّٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمْ سُرَادِقُهَا ۚ وَإِن يَسْتَغِيثُوا۟ يُغَاثُوا۟ بِمَآءٍۢ كَٱلْمُهْلِ يَشْوِى ٱلْوُجُوهَ ۚ بِئْسَ ٱلشَّرَابُ وَسَآءَتْ مُرْتَفَقًا ﴿٢٩﴾

और (ऐ रसूल) तुम कह दों कि सच्ची बात (कलमए तौहीद) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (नाज़िल हो चुकी है) बस जो चाहे माने और जो चाहे न माने (मगर) हमने ज़ालिमों के लिए वह आग (दहका के) तैयार कर रखी है जिसकी क़नातें उन्हें घेर लेगी और अगर वह लोग दोहाई करेगें तो उनकी फरियाद रसी खौलते हुए पानी से की जाएगी जो मसलन पिघले हुए ताबें की तरह होगा (और) वह मुँह को भून डालेगा क्या बुरा पानी है और (जहन्नुम भी) क्या बुरी जगह है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 4758 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

وَقَالَ أَحْمَدُ بْنُ شَبِيبٍ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ يُونُسَ، قَالَ ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ يَرْحَمُ اللَّهُ نِسَاءَ الْمُهَاجِرَاتِ الأُوَلَ، لَمَّا أَنْزَلَ اللَّهُ ‏{‏وَلْيَضْرِبْنَ بِخُمُرِهِنَّ عَلَى جُيُوبِهِنَّ‏}‏ شَقَّقْنَ مُرُوطَهُنَّ فَاخْتَمَرْنَ بِها‏.‏

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2 Sahih al-Bukhari 5138 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَمُجَمِّعٍ، ابْنَىْ يَزِيدَ بْنِ جَارِيَةَ عَنْ خَنْسَاءَ بِنْتِ خِذَامٍ الأَنْصَارِيَّةِ، أَنَّ أَبَاهَا، زَوَّجَهَا وَهْىَ ثَيِّبٌ، فَكَرِهَتْ ذَلِكَ فَأَتَتْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَرَدَّ نِكَاحَهُ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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