इस्लाम में औरतों के क्या अधिकार हैं?

औरतें, परिवार और विवाह क़ुरआन · 4 Hadith · 1

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम ने औरतों को वे अधिकार दिए जो 7वीं सदी के अरब में असामान्य थे: संपत्ति की मालिक बनने और विरासत पाने, अपना पैसा अपने पास रखने, विवाह के लिए रज़ामंदी देने, तलाक़ माँगने, पढ़ने और काम करने का हक़। क़ुरआन कहता है कि मर्द और औरत अल्लाह के सामने मूल्य में बराबर हैं।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन कहता है कि जो भी नेक काम करे, मर्द हो या औरत, ईमान की हालत में, उसे अच्छी ज़िंदगी दी जाएगी और बदला दिया जाएगा। औरत विवाह के बाद अपना नाम और दौलत अपने पास रखती है और घर का ख़र्च उठाना उस पर ज़रूरी नहीं: यह उसके पति की ज़िम्मेदारी है। पैग़ंबर ﷺ ने फ़रमाया, 'तुममें सबसे अच्छे वे हैं जो अपनी पत्नियों के लिए सबसे अच्छे हैं।'

इतिहास में औरतें आलिम, शिक्षक, कारोबारी और शासक थीं: ख़दीजा व्यापारी थीं, आइशा ने सैकड़ों मर्दों और औरतों को पढ़ाया, और फ़ातिमा अल-फ़िहरी ने फ़ेज़ में अल-क़रवीयीन की स्थापना की, जो दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। व्यवहार में, आज कुछ मुस्लिम देशों में औरतों को संस्कृति या क़ानून के कारण वे अधिकार नहीं मिलते जो इस्लाम देता है, और यह समस्या असली है। मुसलमान औरतें, आलिमाएँ और कार्यकर्ता उन्हें बहाल करने के लिए काम करती हैं।

क़ुरआन से

مَنْ عَمِلَ صَٰلِحًۭا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌۭ فَلَنُحْيِيَنَّهُۥ حَيَوٰةًۭ طَيِّبَةًۭ ۖ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿٩٧﴾

मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें

إِنَّ ٱلْمُسْلِمِينَ وَٱلْمُسْلِمَٰتِ وَٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَٱلْقَٰنِتِينَ وَٱلْقَٰنِتَٰتِ وَٱلصَّٰدِقِينَ وَٱلصَّٰدِقَٰتِ وَٱلصَّٰبِرِينَ وَٱلصَّٰبِرَٰتِ وَٱلْخَٰشِعِينَ وَٱلْخَٰشِعَٰتِ وَٱلْمُتَصَدِّقِينَ وَٱلْمُتَصَدِّقَٰتِ وَٱلصَّٰٓئِمِينَ وَٱلصَّٰٓئِمَٰتِ وَٱلْحَٰفِظِينَ فُرُوجَهُمْ وَٱلْحَٰفِظَٰتِ وَٱلذَّٰكِرِينَ ٱللَّهَ كَثِيرًۭا وَٱلذَّٰكِرَٰتِ أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُم مَّغْفِرَةًۭ وَأَجْرًا عَظِيمًۭا ﴿٣٥﴾

(दिल लगा के सुनो) मुसलमान मर्द और मुसलमान औरतें और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतें और फरमाबरदार मर्द और फरमाबरदार औरतें और रास्तबाज़ मर्द और रास्तबाज़ औरतें और सब्र करने वाले मर्द और सब्र करने वाली औरतें और फिरौतनी करने वाले मर्द और फिरौतनी करने वाली औरतें और Âैरात करने वाले मर्द और Âैरात करने वाली औरतें और रोज़ादार मर्द और रोज़ादार औरतें और अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करने वाले मर्द और हिफाज़त करने वाली औरतें और खुदा की बकसरत याद करने वाले मर्द और याद करने वाली औरतें बेशक इन सब लोगों के वास्ते खुदा ने मग़फिरत और (बड़ा) सवाब मुहैय्या कर रखा है

لِّلرِّجَالِ نَصِيبٌۭ مِّمَّا تَرَكَ ٱلْوَٰلِدَانِ وَٱلْأَقْرَبُونَ وَلِلنِّسَآءِ نَصِيبٌۭ مِّمَّا تَرَكَ ٱلْوَٰلِدَانِ وَٱلْأَقْرَبُونَ مِمَّا قَلَّ مِنْهُ أَوْ كَثُرَ ۚ نَصِيبًۭا مَّفْرُوضًۭا ﴿٧﴾

मॉ बाप और क़राबतदारों के तर्के में कुछ हिस्सा ख़ास मर्दों का है और उसी तरह माँ बाब और क़राबतदारो के तरके में कुछ हिस्सा ख़ास औरतों का भी है ख्वाह तर्क कम हो या ज्यादा (हर शख्स का) हिस्सा (हमारी तरफ़ से) मुक़र्रर किया हुआ है

وَٱلْمُؤْمِنُونَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتُ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٍۢ ۚ يَأْمُرُونَ بِٱلْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَيُطِيعُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ ۚ أُو۟لَٰٓئِكَ سَيَرْحَمُهُمُ ٱللَّهُ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ ﴿٧١﴾

और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरते उनमें से बाज़ के बाज़ रफीक़ है और नामज़ पाबन्दी से पढ़ते हैं और ज़कात देते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल की फरमाबरदारी करते हैं यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा अनक़रीब रहम करेगा बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है

From the Sunnah

The authentic hadith behind this answer, from Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim and the Sunan with the grade of the scholars of hadith. Open a reference to read it in the hadith library of this site.

1 Jami' at-Tirmidhi 3895 Sahih (Al-Albani)
Arabic text

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ خَيْرُكُمْ خَيْرُكُمْ لأَهْلِهِ وَأَنَا خَيْرُكُمْ لأَهْلِي وَإِذَا مَاتَ صَاحِبُكُمْ فَدَعُوهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ مِنْ حَدِيثِ الثَّوْرِيِّ مَا أَقَلَّ مَنْ رَوَاهُ عَنِ الثَّوْرِيِّ ‏.‏ وَرُوِيَ هَذَا عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مُرْسَلٌ ‏.‏

Read it in the hadith library

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

This page is translated with machine assistance and may contain mistakes. The English and Arabic versions are our reference. About our sources