इस्लाम में विवाह कैसे होता है?

औरतें, परिवार और विवाह क़ुरआन · 3 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम में विवाह एक मर्द और एक औरत के बीच आपसी रज़ामंदी पर आधारित अनुबंध है, जिसमें पति की ओर से पत्नी को एक तोहफ़ा (मह्र), गवाह और सार्वजनिक घोषणा होती है। क़ुरआन इसे मोहब्बत, रहमत और सुकून का ज़रिया बताता है।

विस्तृत जवाब

औरत का विवाह के लिए राज़ी होना ज़रूरी है। ज़बरदस्ती का विवाह अमान्य है, और पैग़ंबर ﷺ ने एक औरत को वह विवाह रद्द करने की इजाज़त दी जो उसके पिता ने उसकी रज़ामंदी के बिना तय किया था। मह्र केवल पत्नी का होता है। मुसलमान मर्द किसी मुसलमान औरत से, या किसी पाकदामन यहूदी या ईसाई औरत से विवाह कर सकता है, और मुसलमान औरत किसी मुसलमान मर्द से विवाह करती है।

बहुत से मुस्लिम परिवार रिश्तेदारों और दोस्तों के ज़रिए नौजवानों को मिलने में मदद करते हैं, लेकिन चुनाव उन्हीं का रहता है। दोनों पक्षों की रज़ामंदी से तय हुए विवाह ज़बरदस्ती के विवाहों से अलग हैं, जो हराम हैं। विवाह के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति भलाई और आदर के ज़िम्मेदार हैं, और पति आर्थिक ख़र्च का ज़िम्मेदार है।

क़ुरआन से

وَمِنْ ءَايَٰتِهِۦٓ أَنْ خَلَقَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَٰجًۭا لِّتَسْكُنُوٓا۟ إِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُم مَّوَدَّةًۭ وَرَحْمَةً ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ ﴿٢١﴾

और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं

وَءَاتُوا۟ ٱلنِّسَآءَ صَدُقَٰتِهِنَّ نِحْلَةًۭ ۚ فَإِن طِبْنَ لَكُمْ عَن شَىْءٍۢ مِّنْهُ نَفْسًۭا فَكُلُوهُ هَنِيٓـًۭٔا مَّرِيٓـًۭٔا ﴿٤﴾

और औरतों को उनके महर ख़ुशी ख़ुशी दे डालो फिर अगर वह ख़ुशी ख़ुशी तुम्हें कुछ छोड़ दे तो शौक़ से नौशे जान खाओ पियो

وَأَنكِحُوا۟ ٱلْأَيَٰمَىٰ مِنكُمْ وَٱلصَّٰلِحِينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَإِمَآئِكُمْ ۚ إِن يَكُونُوا۟ فُقَرَآءَ يُغْنِهِمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌۭ ﴿٣٢﴾

और अपनी (क़ौम की) बेशौहर औरतों और अपने नेक बख्त गुलामों और लौंडियों का निकाह कर दिया करो अगर ये लोग मोहताज होंगे तो खुदा अपने फज़ल व (करम) से उन्हें मालदार बना देगा और ख़ुदा तो बड़ी गुन्जाइश वाला वाक़िफ कार है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 5138 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَمُجَمِّعٍ، ابْنَىْ يَزِيدَ بْنِ جَارِيَةَ عَنْ خَنْسَاءَ بِنْتِ خِذَامٍ الأَنْصَارِيَّةِ، أَنَّ أَبَاهَا، زَوَّجَهَا وَهْىَ ثَيِّبٌ، فَكَرِهَتْ ذَلِكَ فَأَتَتْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَرَدَّ نِكَاحَهُ‏.‏

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2 Sahih Muslim 1424a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ كَيْسَانَ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي، هُرَيْرَةَ قَالَ كُنْتُ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَأَخْبَرَهُ أَنَّهُ تَزَوَّجَ امْرَأَةً مِنَ الأَنْصَارِ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَنَظَرْتَ إِلَيْهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَاذْهَبْ فَانْظُرْ إِلَيْهَا فَإِنَّ فِي أَعْيُنِ الأَنْصَارِ شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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