इस्लाम ईसाइयत और यहूदियत से कैसे अलग है?

इस्लाम की बुनियादी बातें क़ुरआन · 2 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

तीनों एक ईश्वर में विश्वास रखते हैं और अपनी आस्था की जड़ इब्राहीम तक ले जाते हैं, इसलिए इन्हें इब्राहीमी धर्म कहा जाता है। इस्लाम ईसाइयत से मुख्य रूप से इस बात में अलग है कि वह त्रिदेववाद (ट्रिनिटी) को नहीं मानता और न यह मानता है कि ईसा ईश्वर या ईश्वर के बेटे हैं, और यहूदियत से इस बात में कि वह ईसा और मुहम्मद ﷺ को नबी मानता है।

विस्तृत जवाब

मुसलमान मूसा, ईसा और पहले के नबियों का आदर करते हैं और मानते हैं कि सबने एक ही पुकार दी: केवल अल्लाह की इबादत करो। मुसलमान मानते हैं कि पहले की किताबें अल्लाह की ओर से उतारी गई थीं, लेकिन समय के साथ लोगों ने उनके कुछ हिस्से बदल दिए, इसलिए क़ुरआन आया ताकि जो सच था उसकी पुष्टि करे और जो बदल दिया गया था उसे सही करे।

व्यवहार में बहुत से साझा मूल्य और समानताएँ भी हैं: नमाज़, दान, रोज़ा, हया, सूअर का मांस और ब्याज की मनाही, और फ़रिश्तों, हिसाब-किताब और आख़िरत में विश्वास। क़ुरआन यहूदियों और ईसाइयों को 'अहले-किताब' (किताब वाले) कहता है और मुसलमानों को उनका खाना खाने और उनकी पाकदामन औरतों से विवाह करने की इजाज़त देता है।

क़ुरआन से

قُلْ يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ تَعَالَوْا۟ إِلَىٰ كَلِمَةٍۢ سَوَآءٍۭ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا ٱللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِۦ شَيْـًۭٔا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًۭا مِّن دُونِ ٱللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَقُولُوا۟ ٱشْهَدُوا۟ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ ﴿٦٤﴾

फिर अगर इससे भी मुंह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ अहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यकसॉ है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बनाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुंह मोडें तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं

ٱلْيَوْمَ أُحِلَّ لَكُمُ ٱلطَّيِّبَٰتُ ۖ وَطَعَامُ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ حِلٌّۭ لَّكُمْ وَطَعَامُكُمْ حِلٌّۭ لَّهُمْ ۖ وَٱلْمُحْصَنَٰتُ مِنَ ٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَٱلْمُحْصَنَٰتُ مِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ مِن قَبْلِكُمْ إِذَآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ مُحْصِنِينَ غَيْرَ مُسَٰفِحِينَ وَلَا مُتَّخِذِىٓ أَخْدَانٍۢ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِٱلْإِيمَٰنِ فَقَدْ حَبِطَ عَمَلُهُۥ وَهُوَ فِى ٱلْءَاخِرَةِ مِنَ ٱلْخَٰسِرِينَ ﴿٥﴾

आज तमाम पाकीज़ा चीजें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं और अहले किताब की ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) तुम्हारे लिए हलाल हैं और तुम्हारी ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) उनके लिए हलाल हैं और आज़ाद पाक दामन औरतें और उन लोगों में की आज़ाद पाक दामन औरतें जिनको तुमसे पहले किताब दी जा चुकी है जब तुम उनको उनके मेहर दे दो (और) पाक दामिनी का इरादा करो न तो खुल्लम खुल्ला ज़िनाकारी का और न चोरी छिपे से आशनाई का और जिस शख्स ने ईमान से इन्कार किया तो उसका सब किया (धरा) अकारत हो गया और (तुल्फ़ तो ये है कि) आख़ेरत में भी वही घाटे में रहेगा

From the Sunnah

The authentic hadith behind this answer, from Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim and the Sunan with the grade of the scholars of hadith. Open a reference to read it in the hadith library of this site.

1 Sahih al-Bukhari 3443 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا فُلَيْحُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا هِلاَلُ بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي عَمْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَا أَوْلَى النَّاسِ بِعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ، وَالأَنْبِيَاءُ إِخْوَةٌ لِعَلاَّتٍ، أُمَّهَاتُهُمْ شَتَّى، وَدِينُهُمْ وَاحِدٌ ‏"‏‏.‏ وَقَالَ إِبْرَاهِيمُ بْنُ طَهْمَانَ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏

Read it in the hadith library

2 Sahih Muslim 2365a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّأَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ أَنَا أَوْلَى النَّاسِ بِابْنِ مَرْيَمَ الأَنْبِيَاءُ أَوْلاَدُ عَلاَّتٍ وَلَيْسَ بَيْنِي وَبَيْنَهُ نَبِيٌّ ‏"‏ ‏.‏

Read it in the hadith library

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

This page is translated with machine assistance and may contain mistakes. The English and Arabic versions are our reference. About our sources