बीमार की इयादत, नए चाँद और बारिश की दुआएँ

4 अज़कार

प्रगति

बीमार की इयादत की दुआएँ

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((لاَ بأْسَ طَهُورٌ إِنْ شَاءَ اللَّهُ)).

(कोई बात नहीं, अगर अल्लाह ने चाहा तो यह (बीमारी) गुनाहों की सफ़ाई का ज़रिया बनेगी।)

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((أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفيَكَ)) (سبع مرات).

(मैं अज़ीम अल्लाह से, जो अज़ीम अर्श का रब है, सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे’।(7 बार) (वह (बीमार) ठीक हो जाएगा।))

नया चाँद देखने की दुआ

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((اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ عَلَيْنَا بِالْأَمْنِ وَالْإِيمَانِ، وَالسَّلاَمَةِ وَالْإِسْلاَمِ، وَالتَّوْفِيقِ لِمَا تُحِبُّ رَبَّنَا وَتَرْضَى، رَبُّنَا وَرَبُّكَ اللَّهُ)).

(अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! इस चाँद को हम पर सलामती, ईमान, अमन और इस्लाम के साथ और उस चीज़ के मुताबिक़ निकाल जो तुझे प्रिय है और जिससे तू राज़ी होता है। हमारा और तुम्हारा रब अल्लाह है।)

बारिश के समय की दुआ

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((اللَّهُمَّ صَيِّباً نَافِعاً)).

(ऐ अल्लाह! इसे लाभदायक बारिश बना।)

साल भर में आने वाले पलों की दुआएँ।

स्रोत: हिस्नुल मुस्लिम (मुसलमान का क़िला)। अरबी पाठ अनुवाद के साथ।

प्रश्न

"बीमार की इयादत, नए चाँद और बारिश की दुआएँ" के अज़कार कहाँ से लिए गए हैं?

ये हिस्नुल मुस्लिम से लिए गए हैं, जो क़ुरआन और सहीह सुन्नत के अज़कार और दुआओं का संकलन है।

हर ज़िक्र कितनी बार दोहराना चाहिए?

संख्या हर ज़िक्र के ऊपर दिखाई गई है। जहाँ कोई संख्या न हो वहाँ एक बार पढ़ा जाता है।

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