खाने से पहले और बाद तथा इफ़्तार की दुआएँ

6 अज़कार

प्रगति

खाने से पहले की दुआएँ

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((إِذَا أَكَلَ أَحَدُكُمْ طَعَاماً فَلْيَقُلْ بِسْمِ اللَّهِ، فَإِنْ نَسِيَ فِي أَوَّلِهِ فَلْيَقُلْ بسمِ اللَّهِ فِي أَوَّلِهِ وَآخِرِهِ)).

(जब तुम खाने लगो तो कहो:(बिस्मिल्लाह।)और अगर शुरू करने से पहले कहना भूल जाओ, तो (जब याद आए) कहो:अल्लाह के नाम से, इसकी शुरुआत में भी और इसके अंत में भी।)

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((مَنْ أَطْعَمَهُ اللَّهُ الطَّعَامَ فَلْيَقُلْ: اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِيهِ وَأَطْعِمْنَا خَيْراً مِنْهُ، وَمَنْ سَقَاهُ اللَّهُ لَبَناً فَلْيَقُلْ اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِيهِ وَزِدْنَا مِنْهُ)).

(जिसे अल्लाह खाना खिलाए, वह कहे:(ऐ अल्लाह! हमें इसमें बरकत दे और इससे बेहतर खाना खिला।) और जिसे अल्लाह दूध पिलाए, वह कहे:(ऐ अल्लाह! हमें इसमें बरकत दे और हमें इसमें से और ज़्यादा दे।))

खाने के बाद की दुआएँ

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((الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا، وَرَزَقَنِيهِ، مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلاَ قُوَّةٍ)).

(सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे यह खिलाया और मेरी किसी ताक़त और शक्ति के बिना मुझे यह रोज़ी दी।)

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((الْحَمْدُ لِلَّهِ حَمْداً كَثِيراً طَيِّباً مُبَارَكاً فِيهِ، غَيْرَ [مَكْفِيٍّ وَلاَ ] مُوَدَّعٍ، وَلاَ مُسْتَغْنَىً عَنْهُ رَبَّنَا)).

(अल्लाह की बहुत ज़्यादा, पाकीज़ा और बरकत वाली प्रशंसा, ऐसी प्रशंसा जो कभी ख़त्म न हो, जिससे हम कभी विदा न हों और जिसके बिना हमारा गुज़ारा न हो, वही हमारा रब है।)(इस दुआ के अर्थ के बारे में दूसरी राय भी हैं, उनमें से एक यह है: अल्लाह की बहुत ज़्यादा, पाकीज़ा और बरकत वाली प्रशंसा। वही है जो काफ़ी है, खिलाता है और खिलाया नहीं जाता। वही है जिसकी चाहत की जाती है, उसके पास जो कुछ है उसके साथ, और वही है जिसकी ज़रूरत है, वही हमारा रब है।)

इफ़्तार की दुआएँ

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((ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ العُرُوقُ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ)).

(प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं और अगर अल्लाह ने चाहा तो सवाब पक्का हो गया।)

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((اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِرَحْمَتِكَ الَّتِي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍ أَنْ تَغْفِرَ لِي)).

(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी उस रहमत के वास्ते से, जो हर चीज़ को घेरे हुए है, सवाल करता हूँ कि तू मुझे माफ़ कर दे।)

हर भोजन की शुरुआत और अंत अल्लाह के नाम और हम्द से करें, और रोज़ा खोलते समय दुआ पढ़ें।

स्रोत: हिस्नुल मुस्लिम (मुसलमान का क़िला)। अरबी पाठ अनुवाद के साथ।

प्रश्न

"खाने से पहले और बाद तथा इफ़्तार की दुआएँ" के अज़कार कहाँ से लिए गए हैं?

ये हिस्नुल मुस्लिम से लिए गए हैं, जो क़ुरआन और सहीह सुन्नत के अज़कार और दुआओं का संकलन है।

हर ज़िक्र कितनी बार दोहराना चाहिए?

संख्या हर ज़िक्र के ऊपर दिखाई गई है। जहाँ कोई संख्या न हो वहाँ एक बार पढ़ा जाता है।

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