क्या मुसलमान औरतें काम कर सकती हैं और शिक्षा पा सकती हैं?

औरतें, परिवार और विवाह क़ुरआन · 2 Hadith · 1

संक्षिप्त जवाब

जी हाँ। इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है, मर्द और औरत दोनों पर, और औरतें काम कर सकती हैं और कारोबार चला सकती हैं। पैग़ंबर ﷺ की पहली पत्नी ख़दीजा एक सफल व्यापारी थीं जिन्होंने उन्हें नौकरी पर रखा था।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन पूछता है कि क्या जानने वाले और न जानने वाले बराबर हैं, और पैग़ंबर ﷺ ने फ़रमाया कि जो इल्म की तलाश में कोई राह चले, अल्लाह उसके लिए जन्नत की राह आसान कर देता है। शुरुआती इस्लाम में औरतें हदीस की रावी, आलिमाएँ, डॉक्टर और शिक्षक थीं। आज की मुस्लिम दुनिया में कई देशों में विश्वविद्यालयों में मर्दों से ज़्यादा औरतें दाख़िल हैं, और पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये, इंडोनेशिया और कोसोवो में औरतें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रही हैं।

औरत की आमदनी उसकी अपनी है। जहाँ औरतों को शिक्षा या काम से रोका जाता है, जैसा कुछ जगहों पर सख़्त शासन के तहत है, वहाँ इस्लामी आलिम और मुसलमान औरतें अक्सर कहती हैं कि यह राजनीतिक या सांस्कृतिक पाबंदी है, धार्मिक नहीं।

क़ुरआन से

وَٱلْمُؤْمِنُونَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتُ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٍۢ ۚ يَأْمُرُونَ بِٱلْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَيُطِيعُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ ۚ أُو۟لَٰٓئِكَ سَيَرْحَمُهُمُ ٱللَّهُ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ ﴿٧١﴾

और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरते उनमें से बाज़ के बाज़ रफीक़ है और नामज़ पाबन्दी से पढ़ते हैं और ज़कात देते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल की फरमाबरदारी करते हैं यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा अनक़रीब रहम करेगा बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है

أَمَّنْ هُوَ قَٰنِتٌ ءَانَآءَ ٱلَّيْلِ سَاجِدًۭا وَقَآئِمًۭا يَحْذَرُ ٱلْءَاخِرَةَ وَيَرْجُوا۟ رَحْمَةَ رَبِّهِۦ ۗ قُلْ هَلْ يَسْتَوِى ٱلَّذِينَ يَعْلَمُونَ وَٱلَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ ۗ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَٰبِ ﴿٩﴾

(आख़िर) तू यक़ीनी जहन्नुमियों में होगा क्या जो शख्स रात के अवक़ात में सजदा करके और खड़े-खड़े (खुदा की) इबादत करता हो और आख़ेरत से डरता हो अपने परवरदिगार की रहमत का उम्मीदवार हो (नाशुक्रे) काफिर के बराबर हो सकता है (ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि भला कहीं जानने वाले और न जाननेवाले लोग बराबर हो सकते हैं (मगर) नसीहत इबरतें तो बस अक्लमन्द ही लोग मानते हैं

From the Sunnah

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1 Sahih Muslim 2699a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ الْهَمْدَانِيُّ - وَاللَّفْظُ لِيَحْيَى - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ نَفَّسَ عَنْ مُؤْمِنٍ كُرْبَةً مِنْ كُرَبِ الدُّنْيَا نَفَّسَ اللَّهُ عَنْهُ كُرْبَةً مِنْ كُرَبِ يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَمَنْ يَسَّرَ عَلَى مُعْسِرٍ يَسَّرَ اللَّهُ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ وَمَنْ سَتَرَ مُسْلِمًا سَتَرَهُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ وَاللَّهُ فِي عَوْنِ الْعَبْدِ مَا كَانَ الْعَبْدُ فِي عَوْنِ أَخِيهِ وَمَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا سَهَّلَ اللَّهُ لَهُ بِهِ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ وَمَا اجْتَمَعَ قَوْمٌ فِي بَيْتٍ مِنْ بُيُوتِ اللَّهِ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَيَتَدَارَسُونَهُ بَيْنَهُمْ إِلاَّ نَزَلَتْ عَلَيْهِمُ السَّكِينَةُ وَغَشِيَتْهُمُ الرَّحْمَةُ وَحَفَّتْهُمُ الْمَلاَئِكَةُ وَذَكَرَهُمُ اللَّهُ فِيمَنْ عِنْدَهُ وَمَنْ بَطَّأَ بِهِ عَمَلُهُ لَمْ يُسْرِعْ بِهِ نَسَبُهُ ‏"‏ ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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