क्या मुहम्मद ﷺ ने क़ुरआन बाइबिल से नक़ल किया?

क़ुरआन और पैग़ंबर क़ुरआन · 3 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान इसे नकारते हैं। क़ुरआन बहुत से ऐसे नबियों का ज़िक्र करता है जो बाइबिल में भी हैं, पर वह अक्सर कहानी अलग ढंग से बताता है और उसे सही करता है जिसे मुसलमान पहले की किताबों में किया गया बदलाव मानते हैं। मुहम्मद ﷺ पढ़ नहीं सकते थे, और उनके समय कोई अरबी बाइबिल मौजूद नहीं थी।

विस्तृत जवाब

7वीं सदी के मक्का में बाइबिल का कोई पूरा अरबी अनुवाद नहीं था। पैग़ंबर ﷺ अनपढ़ जाने जाते थे, और उनकी क़ौम ने, जो उनकी विरोधी थी, उन पर आरोप लगाया कि वे किसी आदमी से मदद लेते हैं, और क़ुरआन जवाब देता है कि जिसकी ओर वे इशारा करते हैं उसकी भाषा अजमी (विदेशी) है, जबकि यह साफ़ अरबी है।

क़ुरआन नक़ल होने का दावा नहीं करता: वह कहता है कि वह पहले की किताबों की सच्ची बातों की पुष्टि करता है और उन पर कसौटी है। उसमें ऐसी कहानियाँ हैं जो बाइबिल में नहीं मिलतीं, जैसे आद और समूद की क़ौमें, और वह इब्राहीम के काबा बनाने की कहानी, ईसा की हक़ीक़त और दूसरी बातों में बाइबिल से अलग है। इस्लाम में समानता की वजह एक ही स्रोत है: वही अल्लाह।

क़ुरआन से

وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّهُمْ يَقُولُونَ إِنَّمَا يُعَلِّمُهُۥ بَشَرٌۭ ۗ لِّسَانُ ٱلَّذِى يُلْحِدُونَ إِلَيْهِ أَعْجَمِىٌّۭ وَهَٰذَا لِسَانٌ عَرَبِىٌّۭ مُّبِينٌ ﴿١٠٣﴾

और (ऐ रसूल) हम तहक़ीक़तन जानते हैं कि ये कुफ्फार तुम्हारी निस्बत कहा करते है कि उनको (तुम को) कोई आदमी क़ुरान सिखा दिया करता है हालॉकि बिल्कुल ग़लत है क्योंकि जिस शख्स की तरफ से ये लोग निस्बत देते हैं उसकी ज़बान तो अजमी है और ये तो साफ साफ अरबी ज़बान है

وَمَا كُنتَ تَتْلُوا۟ مِن قَبْلِهِۦ مِن كِتَٰبٍۢ وَلَا تَخُطُّهُۥ بِيَمِينِكَ ۖ إِذًۭا لَّٱرْتَابَ ٱلْمُبْطِلُونَ ﴿٤٨﴾

और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते

وَأَنزَلْنَآ إِلَيْكَ ٱلْكِتَٰبَ بِٱلْحَقِّ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ ٱلْكِتَٰبِ وَمُهَيْمِنًا عَلَيْهِ ۖ فَٱحْكُم بَيْنَهُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ ۖ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَآءَهُمْ عَمَّا جَآءَكَ مِنَ ٱلْحَقِّ ۚ لِكُلٍّۢ جَعَلْنَا مِنكُمْ شِرْعَةًۭ وَمِنْهَاجًۭا ۚ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ وَلَٰكِن لِّيَبْلُوَكُمْ فِى مَآ ءَاتَىٰكُمْ ۖ فَٱسْتَبِقُوا۟ ٱلْخَيْرَٰتِ ۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًۭا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ ﴿٤٨﴾

और (ऐ रसूल) हमने तुम पर भी बरहक़ किताब नाज़िल की जो किताब (उसके पहले से) उसके वक्त में मौजूद है उसकी तसदीक़ करती है और उसकी निगेहबान (भी) है जो कुछ तुम पर ख़ुदा ने नाज़िल किया है उसी के मुताबिक़ तुम भी हुक्म दो और जो हक़ बात ख़ुदा की तरफ़ से आ चुकी है उससे कतरा के उन लोगों की ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और हमने तुम में हर एक के वास्ते (हस्बे मसलेहते वक्त) एक एक शरीयत और ख़ास तरीक़े पर मुक़र्रर कर दिया और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सब के सब को एक ही (शरीयत की) उम्मत बना देता मगर (मुख़तलिफ़ शरीयतों से) ख़ुदा का मतलब यह था कि जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें तुम्हारा इमतेहान करे बस तुम नेकी में लपक कर आगे बढ़ जाओ और (यक़ीन जानो कि) तुम सब को ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 4485 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ، أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ أَهْلُ الْكِتَابِ يَقْرَءُونَ التَّوْرَاةَ بِالْعِبْرَانِيَّةِ، وَيُفَسِّرُونَهَا بِالْعَرَبِيَّةِ لأَهْلِ الإِسْلاَمِ، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ تُصَدِّقُوا أَهْلَ الْكِتَابِ وَلاَ تُكَذِّبُوهُمْ، وَقُولُوا ‏{‏آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ‏}‏ الآيَةَ‏"‏‏.‏

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2 Sahih al-Bukhari 7362 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
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حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ، أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كَانَ أَهْلُ الْكِتَابِ يَقْرَءُونَ التَّوْرَاةَ بِالْعِبْرَانِيَّةِ وَيُفَسِّرُونَهَا بِالْعَرَبِيَّةِ لأَهْلِ الإِسْلاَمِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ تُصَدِّقُوا أَهْلَ الْكِتَابِ، وَلاَ تُكَذِّبُوهُمْ وَقُولُوا ‏{‏آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْكُمْ‏}‏ ‏"‏‏.‏ الآيَةَ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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