इस्लाम के पाँच स्तंभ क्या हैं?

इस्लाम की बुनियादी बातें क़ुरआन · 1 Hadith · 2

संक्षिप्त जवाब

पाँच स्तंभ वे मुख्य इबादतें हैं जो हर मुसलमान करता है: ईमान की गवाही (शहादा), दिन की पाँच नमाज़ें (सलात), दान देना (ज़कात), रमज़ान में रोज़ा रखना (सौम) और जो सक्षम हो उसके लिए जीवन में एक बार मक्का की यात्रा (हज)।

विस्तृत जवाब

शहादा यह कहना और मानना है कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद उसके रसूल हैं। नमाज़ दिन में पाँच बार निश्चित समय पर अदा की जाती है। ज़कात बचत के एक न्यूनतम स्तर से ऊपर की रक़म का हर साल 2.5% ज़रूरतमंदों को दिया जाने वाला दान है। रोज़े का अर्थ है रमज़ान के महीने में फ़ज्र से सूर्यास्त तक खाने, पीने और पति-पत्नी के संबंध से रुकना।

हज मक्का में काबा की यात्रा है, जो एक बार उस इंसान पर फ़र्ज़ है जिसके पास इसके लिए सेहत और पैसा हो। पैग़ंबर ﷺ ने इस्लाम की तुलना एक इमारत से की जो इन पाँच स्तंभों पर खड़ी है। ये मुसलमान के अमल का ढाँचा हैं, और अच्छे अख़लाक़ और नेक कामों से इमारत का बाक़ी हिस्सा भरता है।

क़ुरआन से

۞ لَّيْسَ ٱلْبِرَّ أَن تُوَلُّوا۟ وُجُوهَكُمْ قِبَلَ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ وَلَٰكِنَّ ٱلْبِرَّ مَنْ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةِ وَٱلْكِتَٰبِ وَٱلنَّبِيِّۦنَ وَءَاتَى ٱلْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ ذَوِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْيَتَٰمَىٰ وَٱلْمَسَٰكِينَ وَٱبْنَ ٱلسَّبِيلِ وَٱلسَّآئِلِينَ وَفِى ٱلرِّقَابِ وَأَقَامَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَى ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلْمُوفُونَ بِعَهْدِهِمْ إِذَا عَٰهَدُوا۟ ۖ وَٱلصَّٰبِرِينَ فِى ٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ وَحِينَ ٱلْبَأْسِ ۗ أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ صَدَقُوا۟ ۖ وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُتَّقُونَ ﴿١٧٧﴾

नेकी कुछ यही थोड़ी है कि नमाज़ में अपने मुँह पूरब या पश्चिम की तरफ़ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो ख़ुदा और रोज़े आख़िरत और फ़रिश्तों और ख़ुदा की किताबों और पैग़म्बरों पर ईमान लाए और उसकी उलफ़त में अपना माल क़राबत दारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों और माँगने वालों और लौन्डी ग़ुलाम (के गुलू खलासी) में सर्फ करे और पाबन्दी से नमाज़ पढे और ज़कात देता रहे और जब कोई एहद किया तो अपने क़ौल के पूरे हो और फ़क्र व फाक़ा रन्ज और घुटन के वक्त साबित क़दम रहे यही लोग वह हैं जो दावए ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेज़गार है

From the Sunnah

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1 Sahih al-Bukhari 8 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، قَالَ أَخْبَرَنَا حَنْظَلَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ خَالِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بُنِيَ الإِسْلاَمُ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ، وَإِقَامِ الصَّلاَةِ، وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ، وَالْحَجِّ، وَصَوْمِ رَمَضَانَ ‏"‏‏.‏

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2 Sahih Muslim 16a प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
Arabic text

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ الْهَمْدَانِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ، - يَعْنِي سُلَيْمَانَ بْنَ حَيَّانَ الأَحْمَرَ - عَنْ أَبِي مَالِكٍ الأَشْجَعِيِّ، عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ بُنِيَ الإِسْلاَمُ عَلَى خَمْسَةٍ عَلَى أَنْ يُوَحَّدَ اللَّهُ وَإِقَامِ الصَّلاَةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَصِيَامِ رَمَضَانَ وَالْحَجِّ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ الْحَجِّ وَصِيَامِ رَمَضَانَ قَالَ لاَ ‏.‏ صِيَامِ رَمَضَانَ وَالْحَجِّ ‏.‏ هَكَذَا سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏

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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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