क़ुरआन की 85वीं सूरत

सूरह Al-Buruj

मक्की 22 आयतें पारा 30
Al-Buruj

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْبُرُوجِ ﴿١﴾

बुर्ज़ों वाले आसमानों की क़सम

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَٱلْيَوْمِ ٱلْمَوْعُودِ ﴿٢﴾

और उस दिन की जिसका वायदा किया गया है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَشَاهِدٍۢ وَمَشْهُودٍۢ ﴿٣﴾

और गवाह की और जिसकी गवाही दे जाएगी

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

قُتِلَ أَصْحَٰبُ ٱلْأُخْدُودِ ﴿٤﴾

उसकी (कि कुफ्फ़ार मक्का हलाक हुए) जिस तरह ख़न्दक़ वाले हलाक कर दिए गए

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

ٱلنَّارِ ذَاتِ ٱلْوَقُودِ ﴿٥﴾

जो ख़न्दक़ें आग की थीं

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌۭ ﴿٦﴾

जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌۭ ﴿٧﴾

जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَمَا نَقَمُوا۟ مِنْهُمْ إِلَّآ أَن يُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَمِيدِ ﴿٨﴾

और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

ٱلَّذِى لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ ﴿٩﴾

वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

إِنَّ ٱلَّذِينَ فَتَنُوا۟ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا۟ فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ ٱلْحَرِيقِ ﴿١٠﴾

बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें दीं फिर तौबा न की उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही (इसके अलावा) जलने का भी अज़ाब होगा

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ جَنَّٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْكَبِيرُ ﴿١١﴾

बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे उनके लिए वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं यही तो बड़ी कामयाबी है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

إِنَّ بَطْشَ رَبِّكَ لَشَدِيدٌ ﴿١٢﴾

बेशक तुम्हारे परवरदिगार की पकड़ बहुत सख्त है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

إِنَّهُۥ هُوَ يُبْدِئُ وَيُعِيدُ ﴿١٣﴾

वही पहली दफ़ा पैदा करता है और वही दोबारा (क़यामत में ज़िन्दा) करेगा

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَهُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلْوَدُودُ ﴿١٤﴾

और वही बड़ा बख्शने वाला मोहब्बत करने वाला है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

ذُو ٱلْعَرْشِ ٱلْمَجِيدُ ﴿١٥﴾

अर्श का मालिक बड़ा आलीशान है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

فَعَّالٌۭ لِّمَا يُرِيدُ ﴿١٦﴾

जो चाहता है करता है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْجُنُودِ ﴿١٧﴾

क्या तुम्हारे पास लशकरों की ख़बर पहुँची है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

فِرْعَوْنَ وَثَمُودَ ﴿١٨﴾

(यानि) फिरऔन व समूद की (ज़रूर पहुँची है)

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى تَكْذِيبٍۢ ﴿١٩﴾

मगर कुफ्फ़ार तो झुठलाने ही (की फ़िक्र) में हैं

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

وَٱللَّهُ مِن وَرَآئِهِم مُّحِيطٌۢ ﴿٢٠﴾

और ख़ुदा उनको पीछे से घेरे हुए है (ये झुठलाने के क़ाबिल नहीं)

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

بَلْ هُوَ قُرْءَانٌۭ مَّجِيدٌۭ ﴿٢١﴾

बल्कि ये तो क़ुरान मजीद है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

فِى لَوْحٍۢ مَّحْفُوظٍۭ ﴿٢٢﴾

जो लौहे महफूज़ में लिखा हुआ है

तफ़्सीर अल-मुयस्सर (अरबी)

Al-Buruj 22 में से आयत 1

अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।

सूरह Al-Buruj के बारे में

सूरह Al-Buruj (البروج) क़ुरआन की 85वीं सूरत है। इसमें 22 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।

इसका नाम, البروج, अरबी में इस सूरत की पहचान है।

सूरह Al-Buruj के बारे में प्रश्न

सूरह Al-Buruj में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Buruj में 22 आयतें हैं।

सूरह Al-Buruj मक्की है या मदनी?

वर्गीकरण: मक्की।

सूरह Al-Buruj किस पारे में है?

सूरह Al-Buruj पारा 30 में है।

मैं सूरह Al-Buruj कहाँ सुन सकता हूँ?

इसे आयत-दर-आयत सुनने के लिए इस पन्ने पर प्ले दबाएँ, क़ारी: अब्दुर्रहमान अस-सुदैस, मिशारी अल-अफ़ासी, महमूद ख़लील अल-हुसरी, अब्दुल बासित अब्दुस-समद, माहिर अल-मुऐक़िली, साद अल-ग़ामिदी, अहमद अल-अजमी, अबू बक्र अश-शातरी, हानी अर-रिफ़ाई, मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिंशावी, अली अल-हुज़ैफ़ी, मुहम्मद अय्यूब, अब्दुल्लाह बसफ़र, यासिर अद-दौसरी, नासिर अल-क़तामी, सलाह अल-बुदैर, सऊद अश-शुरैम, अब्दुल्लाह अवाद अल-जुहनी, मुहम्मद जिब्रील।

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