मस्जिद जाने, दाख़िल होने और निकलने की दुआएँ

3 अज़कार

प्रगति

मस्जिद जाने की दुआ

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اللّهُـمَّ اجْعَـلْ فِي قَلْبـي نُوراً ، وَفي لِسَـانِي نُوراً، وَفِي سَمْعِي نُوراً, وَفِي بَصَرِيِ نُوراً, وَمِنْ فََوْقِي نُوراً , وَ مِنْ تَحْتِي نُوراً, وَ عَنْ يَمِينيِ نُوراَ, وعَنْ شِمَالِي نُوراً, وَمْن أَماَمِي نُوراً, وَمِنْ خَلْفيِ نُوراَ, واجْعَلْ فِي نَفْسِي نُوراً, وأَعْظِمْ لِي نُوراً, وَعظِّمْ لِي نُوراً, وَاجْعَلْ لِي نُوراً, واجْعَلنِي نُوراً, أللَّهُمَّ أَعْطِنِي نُوراً, واجْعَلْ فِي عَصَبِي نُوراً, وَفِي لَحْمِي نُوراً, وَفِي دَمِي نُوراً وَفِي شَعْرِي نُوراً, وفِي بَشَرِي نُوراً (أَللَّهُمَّ اجِعَلْ لِي نُوراً فِي قّبْرِي وَ نُوراَ فِي عِظاَمِي) (وَزِدْنِي نُوراً, وَزِدْنِي نُوراَ , وَزِدْنِي نُوراً) (وَهَبْ لِي نُوراً عَلَى نُوراً )

(‘ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे; मेरी ज़बान में नूर; मेरे कानों में नूर; मेरी आँखों में नूर; और मेरे ऊपर नूर रख दे; मेरे नीचे नूर; मेरे दाएँ नूर; मेरे बाएँ नूर; मेरे आगे नूर; मेरे पीछे नूर; और मेरी जान में नूर रख दे; और मेरे लिए नूर को बढ़ा दे; और मेरे लिए नूर को बड़ा कर दे; और मुझे नूर अता कर और मुझे नूर बना दे। ऐ अल्लाह! मुझे नूर अता फ़रमा; और मेरे पट्ठों में नूर रख दे; मेरे गोश्त में नूर; मेरे ख़ून में नूर; और मेरे बालों में नूर और मेरी खाल में नूर।’ [ऐ अल्लाह! मेरी क़ब्र में मेरे लिए नूर रख दे और मेरी हड्डियों में नूर]। [और मुझे नूर में बढ़ा दे और मुझे नूर में बढ़ा दे और मुझे नूर में बढ़ा दे]। [और मुझे नूर पर नूर अता फ़रमा।]’)

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ

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(يَبْدَأُ بِرِجْلِهِ الْيُمْنَى) ، وَيَقُولُ: ((أَعُوذُ بِاللَّهِ العَظِيمِ، وَبِوَجْهِهِ الْكَرِيمِ، وَسُلْطَانِهِ الْقَدِيمِ، مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ)) [بِسْمِ اللَّهِ، وَالصَّلَاةُ] [وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ] ((اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ)).

(मैं अज़ीम अल्लाह की, उसके करीम चेहरे की और उसकी अनंत सत्ता की मरदूद शैतान से पनाह माँगता हूँ। अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल पर दुरूद और सलाम हो। ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।)

मस्जिद से निकलने की दुआ

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((يَبْدَأُ بِرِجْلِهِ الْيُسْرَى)) وَيَقُولُ: ((بِسْمِ اللَّهِ وَالصّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِك، اللَّهُمَّ اعْصِمْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ)).

(अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल पर दुरूद और सलाम हो। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़ल का सवाल करता हूँ। ऐ अल्लाह! मुझे मरदूद शैतान से बचा ले।)

तीन छोटी दुआएँ: मस्जिद के रास्ते में, अंदर क़दम रखते समय और बाहर निकलते समय।

स्रोत: हिस्नुल मुस्लिम (मुसलमान का क़िला)। अरबी पाठ अनुवाद के साथ।

प्रश्न

"मस्जिद जाने, दाख़िल होने और निकलने की दुआएँ" के अज़कार कहाँ से लिए गए हैं?

ये हिस्नुल मुस्लिम से लिए गए हैं, जो क़ुरआन और सहीह सुन्नत के अज़कार और दुआओं का संकलन है।

हर ज़िक्र कितनी बार दोहराना चाहिए?

संख्या हर ज़िक्र के ऊपर दिखाई गई है। जहाँ कोई संख्या न हो वहाँ एक बार पढ़ा जाता है।

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