घर से निकलने और दाख़िल होने की दुआएँ

3 अज़कार

प्रगति

घर से निकलते समय क्या पढ़ें

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(بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَاَ حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ).

(अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, और अल्लाह के सिवा न कोई ताक़त है और न कोई शक्ति।)

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(اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَضِلَّ، أَوْ أُضَلَّ، أَوْ أَزِلَّ، أَوْ أُزَلَّ، أَوْ أَظْلِمَ، أَوْ أُظْلَمَ، أَوْ أَجْهَلَ، أَوْ يُجْهَلَ عَلَيَّ).

(ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इससे कि मैं भटक जाऊँ या भटका दिया जाऊँ, फिसल जाऊँ या फिसला दिया जाऊँ, ज़ुल्म करूँ या मुझ पर ज़ुल्म किया जाए, या जहालत करूँ या मुझ पर जहालत की जाए।)(फिसलना: यानी अनजाने में गुनाह कर बैठना)

घर में दाख़िल होते समय क्या पढ़ें

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(بِسْمِ اللَّهِ وَلَجْنَا، وَبِسْمِ اللَّهِ خَرَجْنَا، وَعَلَى اللَّهِ رَبِّنَا تَوَكَّلْنَا، ثُمَّ لِيُسَلِّمْ عَلَى أَهْلِهِ).

(अल्लाह के नाम से हम दाख़िल होते हैं और अल्लाह के नाम से हम निकलते हैं और अपने रब पर हम भरोसा करते हैं।)

जब भी घर से निकलें या लौटें, अल्लाह का नाम लेकर अपने आने-जाने को सुरक्षित करें।

स्रोत: हिस्नुल मुस्लिम (मुसलमान का क़िला)। अरबी पाठ अनुवाद के साथ।

प्रश्न

"घर से निकलने और दाख़िल होने की दुआएँ" के अज़कार कहाँ से लिए गए हैं?

ये हिस्नुल मुस्लिम से लिए गए हैं, जो क़ुरआन और सहीह सुन्नत के अज़कार और दुआओं का संकलन है।

हर ज़िक्र कितनी बार दोहराना चाहिए?

संख्या हर ज़िक्र के ऊपर दिखाई गई है। जहाँ कोई संख्या न हो वहाँ एक बार पढ़ा जाता है।

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