وَٱلْعَٰدِيَٰتِ ضَبْحًۭا ﴿١﴾
(ग़ाज़ियों के) सरपट दौड़ने वाले घोड़ो की क़सम
क़ुरआन की 100वीं सूरत
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلْعَٰدِيَٰتِ ضَبْحًۭا ﴿١﴾
(ग़ाज़ियों के) सरपट दौड़ने वाले घोड़ो की क़सम
فَٱلْمُورِيَٰتِ قَدْحًۭا ﴿٢﴾
जो नथनों से फ़रराटे लेते हैं
فَٱلْمُغِيرَٰتِ صُبْحًۭا ﴿٣﴾
फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह को छापा मारते हैं
فَأَثَرْنَ بِهِۦ نَقْعًۭا ﴿٤﴾
(तो दौड़ धूप से) बुलन्द कर देते हैं
فَوَسَطْنَ بِهِۦ جَمْعًا ﴿٥﴾
फिर उस वक्त (दुश्मन के) दिल में घुस जाते हैं
إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لِرَبِّهِۦ لَكَنُودٌۭ ﴿٦﴾
(ग़रज़ क़सम है) कि बेशक इन्सान अपने परवरदिगार का नाशुक्रा है
وَإِنَّهُۥ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌۭ ﴿٧﴾
और यक़ीनी ख़ुदा भी उससे वाक़िफ़ है
وَإِنَّهُۥ لِحُبِّ ٱلْخَيْرِ لَشَدِيدٌ ﴿٨﴾
और बेशक वह माल का सख्त हरीस है
۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِى ٱلْقُبُورِ ﴿٩﴾
तो क्या वह ये नहीं जानता कि जब मुर्दे क़ब्रों से निकाले जाएँगे
وَحُصِّلَ مَا فِى ٱلصُّدُورِ ﴿١٠﴾
और दिलों के भेद ज़ाहिर कर दिए जाएँगे
إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّخَبِيرٌۢ ﴿١١﴾
बेशक उस दिन उनका परवरदिगार उनसे ख़ूब वाक़िफ़ होगा
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।
सूरह Al-'Adiyat (العاديات) क़ुरआन की 100वीं सूरत है। इसमें 11 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।
इसका नाम, العاديات, अरबी में इस सूरत की पहचान है।
सूरह Al-'Adiyat में 11 आयतें हैं।
वर्गीकरण: मक्की।
सूरह Al-'Adiyat पारा 30 में है।
इसे आयत-दर-आयत सुनने के लिए इस पन्ने पर प्ले दबाएँ, क़ारी: अब्दुर्रहमान अस-सुदैस, मिशारी अल-अफ़ासी, महमूद ख़लील अल-हुसरी, अब्दुल बासित अब्दुस-समद, माहिर अल-मुऐक़िली, साद अल-ग़ामिदी, अहमद अल-अजमी, अबू बक्र अश-शातरी, हानी अर-रिफ़ाई, मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिंशावी, अली अल-हुज़ैफ़ी, मुहम्मद अय्यूब, अब्दुल्लाह बसफ़र, यासिर अद-दौसरी, नासिर अल-क़तामी, सलाह अल-बुदैर, सऊद अश-शुरैम, अब्दुल्लाह अवाद अल-जुहनी, मुहम्मद जिब्रील।
This page is translated with machine assistance and may contain mistakes. The English and Arabic versions are our reference. About our sources